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      Hemorrhoids hindi meaning- बवासीर
                 बवासीर (Hemorrhoids)
    Hemorrhoids Article you read-
    बवासीर लेख में आप पढ़ेंगे - 

    What is hemorrhoids?बवासीर क्या है?

    Hemorrhoids(Piles) Symptoms

    बवासीर के लक्षण   

    Hemorrhoids(Piles) Causes

    बवासीर के कारण

    Hemorrhoids(Piles) Treatment Hindiबवासीर के उपचार 

    Hemorrhoids(Piles) Ayurvedic Home Base Remedy Hindiबवासीर आयुर्वेदिक घरेलु  उपचार 

    What is hemorrhoids?बवासीर क्या है?

    बवासीर या पाइल्स या (Hemorrhoid / Piles या मूलव्याधि) एक ख़तरनाक बीमारी है। बवासीर 2 प्रकार की होती है। आम भाषा में इसको ख़ूँनी और बादी बवासीर के नाम से जाना जाता है। कही पर इसे महेशी के नाम से जाना जाता है।
                        फ़ास्ट फ़ूड में रेशे की कमी होती है ,जिससे कब्ज़ हो जाती है। यह कब्ज ही आगे जाकर बवासीर बीमारी  बन  जाती है। बवासीर दो प्रकार का होता है -

    1 अरक्तस्रावी बवासीर (Non-Bleeding Piles )

    2 रक्तस्त्राव बवासीर (Bleeding Piles)

    अरक्तस्रावी बवासीर (Non-Bleeding Piles )-

    अरक्तस्रावी बवासीर (Non-Bleeding Piles) रहने पर पेट खराब रहता है। कब्ज बना रहता है। गैस बनती है। बवासीर Piles की वजह से पेट बराबर खराब रहता है। न कि पेट गड़बड़ की वजह से बवासीर होती है। इसमें जलन, दर्द, खुजली, शरीर मै बेचैनी, काम में मन न लगना इत्यादि। टट्टी कड़ी होने पर इसमें खून भी आ सकता है। इसमें मस्सा अन्दर होता है। मस्सा अन्दर होने की वजह से पखाने का रास्ता छोटा पड़ता है और चुनन फट जाती है और वहाँ घाव हो जाता है उसे डाक्टर अपनी जवान में फिशर भी कहते हें। जिससे असहाय जलन और पीडा होती है। बवासीर बहुत पुराना होने पर भगन्दर हो जाता है। जिसे अंग़जी में फिस्टुला कहते हें। फिस्टुला प्रकार का होता है। भगन्दर में पखाने के रास्ते के बगल से एक छेद हो जाता है जो पखाने की नली में चला जाता है। और फोड़े की शक्ल में फटता, बहता और सूखता रहता है। कुछ दिन बाद इसी रास्ते से पखाना भी आने लगता है। बवासीर, भगन्दर की आखिरी स्टेज होने पर यह केंसर का रूप ले लेता है। जिसको रिक्टम केंसर कहते हें। जो कि जानलेवा साबित होता है।

    2- रक्तस्त्राव बवासीर (Bleeding Piles) - 


    रक्तस्त्राव बवासीर (Bleeding Piles) में किसी प्रकार की तकलीफ नही होती है केवल खून आता है। पहले पखाने में लगके, फिर टपक के, फिर पिचकारी की तरह से सिफॅ खून आने लगता है। इसके अन्दर मस्सा होता है। जो कि अन्दर की तरफ होता है फिर बाद में बाहर आने लगता है। टट्टी के बाद अपने से अन्दर चला जाता है। पुराना होने पर बाहर आने पर हाथ से दबाने पर ही अन्दर जाता है। आखिरी स्टेज में हाथ से दबाने पर भी अन्दर नही जाता है।

    Hemorrhoids(Piles) Symptoms

    बवासीर के लक्षण -
    अरक्तस्रावी बवासीर (Non-Bleeding Piles ) तथा रक्तस्त्राव बवासीर (Bleeding Piles) भिन्न-भिन्न रूप में उपस्थित हो सकता है हालांकि बहुत से लोगों में इन दोनो का संयोजन भी हो सकता है।
       रक्ताल्पता पैदा करने के लिए अत्यधिक रक्त-स्राव बेहद कम होती है और जीवन के संकट पैदा करने वाले रक्तस्राव के मामले तो और भी कम हैं।
      इस समस्या का सामना करने वाले बहुत से लोगों को लज्जा आती है और मामला उन्नत होने पर ही वे चिकित्सीय लेने जाते हैं।
                 टट्टी जातेसमय रक्त के टपके गिरना,काटा चभने जैसी वेदना, गुदा में जलन ,खुजली आदि हो तो ये बवासीर  लक्षण है। लगातार कब्ज रहने से जब टट्टी करते समय जोर लगते रहते है तो इससे बवासीर हो जाते है। गुदा वाली जगह पर दर्द होना जिस वजह से उठने, बैठने और चलने में दर्द होता है। दूसरा प्रमुख लक्षण है गुदा वाली जगह पर बार-बार खुजली का होना।पेट में कब्ज बनने लगती है और रोगी दर्द की वजह से मल त्याग करने से डरता है। खून के लगातार बहने की वजह से रोगी का हीमोग्लोबिन कम हो जाता है।
                                 मल निकलने वाली जगह यानी गुदे में सूजन आने लगती है। अंदर वाली बवासीर में मस्से बाहर लटकने लगते है और रोगी मल त्याग नहीं कर पाता जिस वजह से वह
    सुझाव जो बवासीर को होने नहीं देंगे
    babaser 

    Hemorrhoids(Piles) Causes

     बवासीर के कारण

    • कुछ व्यक्तियों में बवासीर Piles रोग पीढ़ी दर पीढ़ी पाया जाता है। अतः अनुवांशिकता बवासीर Piles रोग का एक कारण हो सकता है। 
    • बवासीर होने की कई वजह होती है जिसमें से एक है अधिक देर तक एक जगह कुर्सी पर बैठे रहना।
    • अधिक शराब का का सेवन करना।
    • निराहार उपवास करने वाले लोगों को भी पाइल्स हो सकता है।
    • मोटापे का कारण भी बवासीर का मुख्य कारण बन सकता है।
    • जिन व्यक्तियों को अपने रोजगार की वजह से घंटों खड़े रहना पड़ता हो, जैसे बस कंडक्टर, ट्रॉफिक पुलिस, पोस्टमैन या जिन्हें भारी वजन उठाने पड़ते हों,- जैसे कुली, मजदूर, भारोत्तलक वगैरह, उनमें इस बीमारी से पीड़ित होने की संभावना अधिक होती है।
    •  ज्यादा तेज मिर्च मसालों का अधिक सेवन करना।
    • टेंशन और मानसिक रोग भी बवासीर का कारण बन सकता है।
    • कब्ज भी बवासीर Piles को जन्म देती है, कब्ज की वजह से मल सूखा और कठोर हो जाता है जिसकी वजह से उसका निकास आसानी से नहीं हो पाता मलत्याग के वक्त रोगी को काफी वक्त तक पखाने में उकडू बैठे रहना पड़ता है, जिससे रक्त वाहनियों पर जोर पड़ता है और वह फूलकर लटक जाती हैं। बवासीर Piles गुदा के कैंसर की वजह से या मूत्र मार्ग में रूकावट की वजह से या गर्भावस्था में भी हो सकता है।
    • देर तक किसी गाड़ी में बैठे रहना या मोटर बाईक चलना।
    • गर्भावस्था के दौरान आखरी के तीन महीनों में गर्भवती को बवासीर हो सकता है।
    • जो लोग पानी का सेवन कम करते हैं उन्हें भी पाइल्स हो सकता है।
    • अधिक देर तक रात में काम करना।
    • मल त्याग करते समय अधिक तेजी से प्रेश लगाना।

    Hemorrhoids(Piles) Treatment Hindi

    बवासीर के उपचार 

    बवासीर Piles निदान के पश्चात प्रारंभिक अवस्था में कुछ घरेलू उपायों द्वारा रोग की तकलीफों पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है। सबसे पहले कब्ज को दूर कर मल त्याग को सामान्य और नियमित करना आवश्यक है। इसके लिये तरल पदार्थों, हरी सब्जियों एवं फलों का बहुतायात में सेवन करें। तली हुई चीजें, मिर्च-मसालों युक्त गरिष्ठ भोजन न करें। रात में सोते समय एक गिलास पानी में इसबगोल की भूसी के दो चम्मच डालकर पीने से भी लाभ होता है। गुदा के भीतर रात के सोने से पहले और सुबह मल त्याग के पूर्व दवायुक्त बत्ती या क्रीम का प्रवेश भी मल निकास को सुगम करता है। गुदा के बाहर लटके और सूजे हुए मस्सों पर ग्लिसरीन और मैग्नेशियम सल्फेट के मिश्रण का लेप लगाकर पट्टी बांधने से भी लाभ होता है। मलत्याग के पश्चात गुदा के आसपास की अच्छी तरह सफाई और गर्म पानी का सेंक करना भी फायदेमंद होता है। यदि परोक्त उपायों के पश्चात भी रक्त स्राव होता है तो चिकित्सक से सलाह लें। इन मस्सों को हटाने के लिये कई विधियां उपलब्ध है। मस्सों में इंजेक्शन द्वारा ऐसी दवा का प्रवेश जिससे मस्से सूख जायें। मस्सों पर एक विशेष उपकरण द्वारा रबर के छल्ले चढ़ा दिये जाते हैं, जो मस्सों का रक्त प्रवाह अवरूध्द कर उन्हें सुखाकर निकाल देते हैं। एक अन्य उपकरण द्वारा मस्सों को बर्फ में परिवर्तित कर नष्ट किया जाता है। शल्यक्रिया द्वारा मस्सों को काटकर निकाल दिया जाता है।

    Hemorrhoids(Piles) Ayurvedic Home Base Remedy Hindi 

    बवासीर आयुर्वेदिक घरेलु  उपचार-

    अरक्तस्रावी बवासीर (Non-Bleeding Piles ) 

    1. मालिश-नियमित रूप से नित्य शरीर की मालिश करने से मस्सो में लाभ होता है। 
    2 . तुरई-नित्य तुरई की  सब्जी खाने से बवासीर ठीक हो जाता   है। 
    3 . चुकंदर-बवासीर के मस्से चुकंदर खाते  रहने से झड़ जाते है। 
    4 . गाजर -कच्ची गाजर खाने से या रस पीने से लाभ होता है। 
    5. पालक-गाजर का रास तीन भाग और पालक  भाग मिलकर पीने से बवासीर में लाभ होता है । 

    2- रक्तस्त्राव बवासीर (Bleeding Piles) - 

    1. दूध -गरम दूध में आधे नीम्बू का रास डालकर तुरंत हर तीन घंटे  में पिलाये। 
    2. आँवला -सूखे आँवले   पीसकर एक चाय की चम्मच सुबह-शाम दो बार छाछ  या दूध से लेने से खुनी बवासीर में लाभ होता है। दूध गर्म हो। 
    3 . मूली- कप मूली का रास  चम्मच देशी घी मिलकर सुबह-शाम पिए लाभ होगा। 
    4. एक चम्मच करेले का रास शक्कर मिलकर दो बार नित्य पीने से लाभ 
    होता है। 5. सिके हुए गरम-गरम चने से रक्तस्त्राव बवासीर  होता है। 

    अरक्तस्रावी बवासीर (Non-Bleeding Piles ) तथा रक्तस्त्राव बवासीर (Bleeding Piles) दोनों रोगो में प्रयोग में  आयुर्वेदिक घरेलु  उपचार 


    • प्रतिदिन  2 लीटर गाय के दूध से बनी दही से निकली हुई मीठी छांछ में थोड़ा जीरा मिलाकर सेवन करने से बवासीर खत्म होने लगती है
    • जिमीकंद और गुड का हमेशा इस्तेमाल करते रहने से भी बवासीर खत्म होने लगती है।
    • मल, मूत्र, गैस को अधिक देर तक न रोकें क्योंकि यह बवासीर का कारण बनती है।
    • पपीता, अंगूर, आम का सवेन करने से बवासीर नहीं होती।
    • तिल के लड्डू को खाने से बवासीर रोग में लाभ मिलता है।
    • नारियलपानी, सूप, पानी, और छाछ जैसी तरल चीजों का सेवन करें
    • यह मल को कठोर नहीं होने देती जिससे रोगी को मल त्यागना आसान हो जाता है।
    • उबले हुए दूध में पके केले को मसलकर दिन में 2 से 3 बारी लें।
    • 2 से 3 महीने तक लगातार पालक, गाजर और चुकंदर का रस रोज पीएं बवासीर में लाभ मिलता है। 
    • नीम का तेल बवासीर वाली जगह पर लगायें।
    • मेथी, गाजर, शलजम, करेला, अदरक, प्याज आदि का सेवन करना बवासीर के रोग में लाभ देता है।
    • सुबह सुबह जामुन में नमक लगाकर 1 से 2 महीने तक सेवन करते रहने से भी बवासीर ठीक हो सकता है।
    • छाछ में अजवाइन डालकर सेवन करते रहें बवासीर में लाभ मिलता ।
    • मूली खाने से बवासीर में पूर्ण लाभ मिलता है।
    • अदरक, पुदीने का रस, और नींबू को पानी व शहद के साथ मिलाकर
    • प्रतिदिन सेवन करने से भी बवासीर में लाभ मिल सकता है।
    • पका हुआ केला लें और उसे चीरकर दो टुकड़े कर लें और उसमें कत्था पीसकर छिड़क दें और इसे खुले आकाश के नीचे शाम को रख दें और सुबह उस केले का सेवन करें। लगातार एक सप्ताह तक एैसा करने से खतरनाक से खतरनाक बवासीर Piles खत्म हो जाती है।
    • बकरी का  दूध सुबह और शाम पीने से बवासीर से खून आना बंद हो जाएगा।
    • जिनको बवासीर Piles है, शौच वाली जगह से जिनको खून आता है, वे २ नींबू का रस निकालकर, छान लें और एनिमा के साधन से शौच वाली जगह से एनिमा द्वारा नींबू का रस लें और १० मिनट सिकोड़ कर सोये रहें । इतने में वो नींबू गर्मी खींच लेगा और शौच होगा । हफ्ते में ३-४ बार करें कैसा भी बवासीर Piles हो फायदा होगा ।
    • हरड़ को गुड के साथ लेने से बवासीर Piles में लाभ होता है।
    • कमल के हरे पत्ते को पीसकर उसमें मिश्री को मिलाकर खाने से  बवासीर Piles से खून आना बंद हो जाता है।
    • छाछ और दही रोज खाएं बवासीर Piles में लाभ होगा ।
    • एक ग्राम काले तिल और एक ग्राम दूध का मक्खन को मिलाकर खाने से बवासीर रोग ठीक हो जाता है।
    • छोटी पिप्पली को अच्छे से पीसकर उसका चूर्ण बना लें और इसे शहद के साथ सेवन करें।
    • 6 ग्राम शक्कर और नीम के 11 बीज को सुबह फांकने से बवासीर रोग में आराम मिलता है।
    • ताजा मक्खन, नागकेशर और मिश्री तीनों को बराबर मात्रा में मिलाकर खाने से बवासीर रोग में फायदा मिलता है।
    • हरड़ के साथ गुड खाने से भी बवासीर में लाभ मिलता है।
    • 15 ग्राम काले तिल पिसकर, 10-15 ग्राम मख्खन के साथ मिलाकर सुबह सुबह खा लो । कैसा भी बवासीर हो मिट जाता है ।
    • जिनको बवासीर है, शौच वाली जगह से जिनको खून आता है, वे २ नींबू का रस निकालकर, छान लें और एनिमा के साधन से शौच वाली जगह से एनिमा द्वारा नींबू का रस लें और १० मिनट सिकोड़ कर सोये रहें । इतने में वो नींबू गर्मी खींच लेगा और शौच होगा । हफ्ते में ३-४ बार करें कैसा भी बवासीर हो फायदा होगा ।

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