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    बुधवार, 25 नवंबर 2015

    Leucorrhoea Shvet Pradar treatment-Safed Pani

     Leucorrhoea meaning in hindi - श्वेत प्रदर

    What is leucorrhoea ?
    क्या है श्वेत प्रदर?
    kya hai Shvet Pradar
    श्वेत प्रदर या ल्यूकोरिआ या लिकोरिआ (leucorrhoea ) या फेद पानी आना स्त्रिओं का एक रोग है जिसमें स्त्री-योनि से असामान्य मात्रा में सफेद रंग का गाढा और बदबूदार पानी निकलता है और जिसके कारण वे बहुत क्षीण तथा दुर्बल हो जाती है। महिलाओं में श्वेत प्रदर रोग आम बात है। ये गुप्तांगों से पानी जैसा बहने वाला स्त्राव होता है। Pradar खुद कोई रोग नहीं होता परंतु अन्य कई रोगों के कारण होता है। श्वेत प्रदर वास्तव में एक बीमारी नहीं है बल्कि किसी अन्य योनिगत या गर्भाशयगत व्याधि का लक्षण हैय या सामान्यत: जनन अंगों में सूजन का बोधक है।
    यह नारियों के गुप्तांग से बहने वाला पानी जैसा स्त्राव है। श्वेत प्रदर Shvet Pradar स्वयं में कोई रोग नहीं है बल्कि अनेक रोगों के परिणामस्वरूप होता है।
    You Read in leucorrhoea Article -
    आप श्वेत प्रदर  लेख में पढ़ेंगे -
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    श्वेत प्रदर का कारण-Shvet Pradar ka karan 
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    श्वेत प्रदर के लक्षण-Shvet Pradar ke lashan 
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    श्वेत प्रदर का इलाज-Shvet Pradar ka illaj
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    श्वेत प्रदर का आयुर्वेदिक घरेलु नुस्खे-Shvet Pradar ka Ayurvedic Gharelu upchar

    leucorrhoea causes Hindi
    श्वेत प्रदर का कारण- 
    Shvet Pradar ka karan 

    (1) अत्यधिक उपवास, उत्तेजक कल्पनाएं, अश्लील वार्तालाप, मुख मैथुन, सम्भोग में उल्टे आसनो का प्रयोग करना, सम्भोग काल में अत्यधिक घर्षण या आघात, रोगग्रस्त पुरुष के साथ सहवास,दो तीन पुरूषों से एकसाथ अत्याधिक संभोग करने से leucorrhoea Shvet Pradar श्वेत प्रदर रोग हो जाता है 
    (2) शरीर में विषाक्त पदार्थों के संचय शरीर में जैसे मफीम धतूरा गाजा सिगरेट शराब श्वेत प्रदर रोग leucorrhoea Shvet Pradar कारण हो सकता है 
    (3) सहवास के बाद योनि को स्वच्छ जल से न धोना व वैसे ही गन्दे बने रहना आदि इस रोग के çमुख कारण बनते हैं। 
    (4) बार-बार गर्भपात कराना भी Shvet Pradar सफेद पानी का एक मुख्य कारण है।
    (5) मसालेदार और तले हुए खाद्य पदार्थ और कार्बोहाइड्रेट की बहुत खाने से Shvet Pradar सफेद पानी आने का कारण है। 
    (6) खुजली द्वारा उत्पादित घाव के कारण श्वेत प्रदर का कारण बन जाता है।
    (7) जीवाणु संक्रमण का कारण leucorrhoea ya Shvet Pradar  बन जाता है।
    (8) रक्ताल्पता और आदि मधुमेह जैसी बीमारियों से श्वेत प्रदर हो जाता है।
    (9) हार्मोनल गड़बड़ी से leucorrhoea Shvet Pradar सफेद पानी का एक  कारण हो सकता है।

    Leucorrhoea symptoms hindi
    श्वेत प्रदर के लक्षण-Shvet Pradar ke lashan 

    योनि मार्ग से सफेद, चिपचिपा गाढ़ा स्राव होना आज ३५-४५  उम्र की महिलाओं की एक सामान्य समस्या हो गई है। सामान्य भाषा में इसे सफेद पानी जाना कहते हैं। भारतीय महिलाओं में यह आम समस्या है लेकिन बिना डॉक्टरी इलाज के आभाव में इस प्रदर बीमारी को बड़ा बना देते है| चिकित्सा सलाह ना लेने के वजह उनकी शर्म और दुनिया जानेगी तो क्या सोचेगी पर ये आम बीमारी है किसी को भी हो सकती है|  बिना चिकित्सा के ही रह जाती है। सबसे बुरी बात यह है कि इसे महिलाएँ अत्यंत सामान्य रूप से लेकर ध्यान नहीं देती, छुपा लेती हैं श्वेत प्रदर  में योनि की दीवारों से या गर्भाशय ग्रीवा से श्लेष्मा का स्राव होता है, जिसकी मात्रा, स्थिति और समयावधि अलग-अलग स्त्रियों में अलग-अलग होती है। यदि स्राव ज्यादा मात्रा में, पीला, हरा, नीला हो, खुजली पैदा करने वाला हो तो स्थिति असामान्य मानी जाएगी। इससे शरीर कमजोर होता है और कमजोरी से श्वेत  बढ़ता है। इसके çभाव से हाथ-पैरों में दर्द, कमर में दर्द, पिंडलियों में खिंचाव, शरीर भारी रहना, चिड़चिड़ापन रहता है। इस रोग में स्त्री के योनि मार्ग से सफेद, चिपचिपा, गाढ़ा, बदबूदार स्राव होता है, इसे वेजाइनल डिस्चार्ज कहते हैं। इस रोग के कारणों की जांच स्त्री रोग विशेषज्ञ, lady doctorसे करा लेना चाहिए, ताकि उस कारण को दूर किया जा सके।

    Leucorrhoea treatment
    श्वेत प्रदर का इलाज-Shvet Pradar ka illaj Upchar 

    (1) इसके लिये सबसे पहले जरूरी है साफ-सफाई - योनि को धोने के लिये सर्वोत्तम उपाय फिटकरी के जल से धोना है या फिटकरी से धोना चाहिए क्योकि फिटकरी  एक श्रेष्ठ जीवाणु नाशक सस्ती औषधि है, सर्वसुलभ भी  है।
    (2) बोरिक एसिड के घोल का भी योग करा जा सकता है और यदि अंदरूनी सफाई के लिये पिचकारी से धोना (डूश लेना) हो तो आयुर्वेद की अत्यंत   प्रभावकारी औषधि नारायण तेलß का   प्रयोग सर्वोत्तम होता है।
    मैथुन के पश्चात अवश्य ही साबुन से सफाई करना चाहिए।
    (3) प्रत्येक बार मल-मूत्र त्याग के पश्चात अच्छी तरह से संपूर्ण अंग को साबुन से धोना
    (4) बार-बार गर्भपात कराना भी सफेद पानी का एक   प्रमुख कारण है। अत: महिलाओं को अनचाहे गर्भ की स्थापना के   प्रति सतर्क रहते हुए गर्भ निरोधक उपायों का   प्रयोग (कंडोम, कापर टी, मुँह से खाने वाली गोलियाँ) अवश्य करना चाहिए। साथ ही एक या दो बच्चों के बाद अपना या अपने पति का नसबंदी आपरेशन कराना चाहिए
     शर्म त्यागकर इसके बारे में अपने पति एवं डाक्टर को बाताना चाहिये।
    • योनिक स्राव क्या होता है और कब उसे असामान्य कहा जाता है?

    ग्रीवा से उत्पन्न श्लेष्मा (म्युकस) का बहाव योनिक स्राव कहलाता है। अगर स्राव का रंग, गन्ध या गाढ़ापन असामान्य हो अथवा मात्रा बहुत अधिक जान पड़े तो हो सकता है कि रोग होयोनिक स्राव (टंहपदंस कपेबींतहम) सामान्य प्रक्रिया  है जो कि मासिक चक्र के अनुरूप परिवर्तित होती रहती है। दरअसल यह स्राव योनि को स्वच्छ तथा स्निग्ध रखने की प्राकृतिक  प्रक्रिया है वहीं अण्डोत्सर्ग के दौरान यह स्राव इसलिये बढ़ जाता है ताकि अण्डाणु आसानी से तैर सके. अण्डोत्सर्ग के पहले काफी मात्रा में श्लेष्मा (उनबवने) बनता है। यह सफेद रंग का चिपचिपा पदार्थ होता है। लेकिन कई परिस्थितियों में जब इसका रंग बदल जाता है तथा इससे बुरी गंध आने लगती है तो यह रोग के लक्षण का रूप ले लेता है।
    सफेद योनिक स्राव: मासिक चक्र के पहले और बाद में पतला और सफेद योनिक स्राव सामान्य है। सामान्यत: सफेद योनिक स्राव के साथ खुजलाहट या चुनमुनाहट नहीं होती है। यदि इसके साथ खुजली हो रही है तो यह खमीर संक्रमण (लमेज  पदमिबजपवद) को प्रदर्शित करता है। साफ और फैला हुआ: यह उर्वर (मितजपसम) श्लेष्मा है। इसका आशय है कि आप अण्डोत्सर्ग के चक्र में हैं। साफ और पानी जैसा: यह स्राव महिलाओं में सामान्य तौर पर पूरे चक्र के दौरान अलग-अलग समय पर होता रहता है। यह भारी तब हो जाता है जब व्यायाम या मेहनत का काम किया जाता है
    पीला या हरा: यह स्राव सामान्य नहीं माना जाता है तथा बीमारी का लक्षण है। यह यह दर्शता है कि योनि में या कहीं तीव्र संक्रमण है। विशेषकर जब यह पनीर की तरह और गंदी बदबू से युä हो तो तुरंत चिकित्सक के पास जाना चाहिये. भूरा: यह स्राव अक्सर माहवारी के बाद देख ने को मिलता है। दरअसल यह सफाई की स्वाभाविक प्रक्रिया है। पुराने रä का रंग भूरा सा हो जाता है सामान्य प्रक्रिया के तहत श्लेष्मा के साथ बाहर आता है।
    shvet Prader
    Safed paani Upchar

    रäिम धब्बेध्भूरा स्रावरू यह स्राव अण्डोत्सर्गध्मध्य मासिक के दौरान हो सकता है। कई बार बार शुरूआती गर्भावस्था के दौरान भी यह स्राव देखने को मिलता है। इस आधार पर कई बार इसे गर्भधारण का संकेत भी माना जाता है।

    • किन परिस्थितियों के कारण सामान्य योनिक स्राव में वृद्धि होती है?

    सामान्य योनिक स्राव की मात्रा में निम्नलिखित स्थितियों में वृद्ध हो सकती है- योनपरक उत्तेजना, भावात्मक दबाव और अण्डोत्सर्ग (माहवारी के मध्य में जब अण्डकोष से अण्डे का सर्जन और विसर्जन होता है)

    • असामान्य योनिक स्राव के क्या कारण होते हैं?

    असामान्य योनिक स्राव के ये कारण हो सकते हैं- 

    (१) योन सम्बन्धों से होने वाला संक्रमण
     (२) जिनके शरीर की रोधक्षमता कमजोर होती है या जिन्हें मधुमेह का रोग होता है उनकी योनि में सामान्यत: फंगल यीस्ट नामक संक्रामक रोग हो सकता है।
    • असामान्य योनिक स्राव से कैसे बचा जा सकता है?

    योनिक स्राव से बचने के लिए –

    (१) योनि को बहुत भिगोना नहीं चाहिए बहुत सी महिलाएं सोचती हैं कि माहवारी या सम्भोग के बाद योनि को भरपूर भिगोने से वे साफ महसूस करेंगी वस्तुत: इससे योनिक स्राव और भी बिगड़ जाता है क्योंकि उससे योनि पर छाये स्वस्थ बैक्टीरिया मर जाते हैं जो कि वस्तुत: उसे संक्रामक रोगों से बचाते हैं
    (2) दबाव से बचें।
    (3) योन सम्बन्धों से लगने वाले रोगों से बचने और उन्हें फैलने से रोकने के लिए कंडोम का इस्तेमाल अवश्य करना चाहिए।
    (4) मधुमेह का रोग हो तो रä की शर्करा को नियंत्रण में रखाना चाहिए।

                                                                असामान्य योनिक स्राव के लिए क्या डाक्टर से सम्पर्क करना चाहिए?

    Leucorrhoea: what food to avoid 

    श्वेत प्रदर - क्या खाने से बचना चाहये 

    (1) पूरी तरह से मसालेदार और तले हुए भोजन से बचें।
    (2) भोजन सफेद आटे से बने बचें
    (3) सफेद चीनी उत्पादों से बचे
    (4) चाय, कॉफी, शराब और अन्य मसालों से बचें
    (5) Tinned / डिब्बा बंद भोजन से बचें

    Ayurvedic home remedies leucorrhoea

    श्वेत प्रदर का आयुर्वेदिक घरेलु नुस्खे- Shvet Pradar ka Ayurvedic Gharelu upchar

    (1) Shvet Pradar ka desi ilaj - श्वते प्रदर leucorrhoea में पहले तीन दिन तक अरण्डी का १.१ चम्मच तेल पीने के बाद औषध आरंभ करने पर लाभ होगा। श्वेतप्रदर के रोगी को सख्ती से ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
    (2) Shvet Pradar ka gharelu upchar -  पूरी सफाई, हल्का व्यायाम, कब्ज दूर करना, चाय, मैदा, तली हुई चीजों का त्याग , फल, सब्जियाँ खाना। काम, क्रोध, शोक, चिन्ता आदि भावनात्मक वासना  से बचना चाहिए। 
     दूर करने के उपाय-     उत्तम स्वास्थ्य बनाये रखना, पूर्ण सफाई, हल्का व्यायाम, कब्ज दूर करना, चाय, मैदा, तली हुई चीजों का त्याग, फल, सब्जियाँ खाना। काम, क्रोध, शोक, चिन्ता आदि भावनात्मक उद्वेगों से बचना चाहिए।

    (3) Shvet Pradar ka ilaj - आँवला-   1. तीन ग्राम पिसा हुआ आँवला ;चूर्णद्ध, 6 ग्राम शहद में मिलाकर नित्य एक बार 30 दिन लेने से श्वेत प्रदर में लाभ होता है। परहेज खटाई का रखें।


    2. Shvet Pradar in hindi - बीस ग्राम आँवले का रस शहद में मिलाकर एक माह लगातार पीने से श्वेत-प्रदर में लाभ होता है।

    (4) Shvet Pradar in ayurveda - केला- केला खाकर ऊपर से दूध में शहद मिलाकर पीने श्वेत प्रदर  में लाभ होता है।

    2. Shwet pradar in hindi - एक केला आठ ग्राम घी के साथ सुबह-षाम दो बार दस दिन तक खायें। केले की दूध में खीर बनाकर खाने से भी लाभ होता है।

    3. Shweta pradar in hindi -  कच्चे केले की सब्जी बनाकर खायें।

    4. Shweta pradar home remedies - दो केले और 3 चम्मच शहद मिलाकर खायें।

    (5) Swet pradar ka ilaj - फालसा-    श्वेत-प्रदर में फालसा लाभदायक है।

    (6) Swet pradar treatment - टमाटर-    टमाटर का सेवन श्वेत प्रदर में लाभदायक है।

    (7) Leucorrhoea treatment - सिंघाड़ा-    सिंघाड़े के आटे का हलुवा खाने से श्वेत प्रदर एवं रोटी खाने से रक्त प्रदर ठीक हो जाता है।

    (8) Leucorrhoea in pregnancy - अनार-    अनार के ताजा हरे पत्ते 30 तथा दस काली मिर्च पीस कर आधा गिलास पानी मे घोल कर छान कर नित्य सुबह-षाम पीयें।

    (9) Leucorrhoea home remedies - चावल-    आधा कप चावल एक कप पानी में भिगो दें। 100 ग्राम मूँग तवे पर सेक कर पीस का शीषी भर लें। एक चम्मच मूँग का यह चूर्ण भीगे हुए चावल के पानी के एक कप में घोल कर नित्य एक बार पीयें। श्वेत प्रदर में लाभ होगा।

    (10) Leucorrhoea in hindi - चना-        सिके हुए चने पीसकर उनमें खाण्ड (नहंत) मिलाकर खायें। ऊपर से दूध में देषी घी मिलाकर पीयें। इससे श्वेत प्रदर गिरना बन्द होे जाता है।

    (11) Leucorrhoea ayurvedic medicine - मसूर की दाल-    मसूर के आटे का चूरमा, मलीदा बनाकर खाने से प्रदर में लाभदायक है।

    (12) Leucorrhoea and pregnancy - फिटकरी-    श्वेत प्रदर व रक्त प्रदर - दोनों में चने के बराबर फिटकरी पानी से नित्य तीन बार फँकी लेने से ठीक हो जाते हैं। फिटकरी पानी में मिलाकर मूत्रांग को गहराई तक सुबह-षाम धोयें, पिचकारी दें।

    (13) Leucorrhoea and its treatment - जीरा-        श्वेत प्रदर होने पर जीरा भूनकर चीनी के साथ दें।

    (14) Leucorrhoea baba ramdev - सौंठ-        10 ग्राम सौंठ पाव भर पानी में डालकर उबालें। चौथाई पानी रहने पर छानकर पीयें। इस प्रकार तीन सप्ताह पीयें।

    (15) Leucorrhoea best treatment - तुलसी-  तुलसी के पत्तों का रस और शहद समान मात्रा में मिलाकर प्रातः और शाम को चाटने से लाभ होता है।

    (16) leukorrhea before period - तुलसी के रस में जीरा मिलाकर गाय के दूध के साथ सेवन करें। तुलसी के पत्ते के रस    में मिश्री मिलाकर सेवन करने के रक्त प्रदर ठीक हो जाता है
    (17) Leucorrhoea medical treatment - सूखे आंवले को कूट-पीसकर चूर्ण बनाकर ३ ग्राम चूर्ण सुबह शाम जल के साथ कुछ महीने सेवन करने से श्वेत प्रदर ( Leucorrhoea Shvet Pradar ) रोग ठीक हो जाता है.
     

    (18) Leucorrhoea in ayurveda - पके हुए झरबेरो को सुखाकर बारीक चूर्ण बनाकर रखे. प्रतिदिन ३ ग्राम चूर्ण शक्कर और मधु मिलकर सुबह शाम सेवन करने से श्वेत प्रदर ( Leucorrhoea Shvet Pradar ) ठीक हो जाता है.
     

    (19) Leucorrhoea ka ilaj - नागकेशर ३ ग्राम रोज मट्ठे के साथ सेवन करने से ( Leucorrhoea Shvet Pradar ) का निवारण होता है.
     

    (20) रोहितक की जड़ को जल के साथ पीसकर चाटकर सेवन करने से  श्वेत प्रदर ( Leucorrhoea Shvet Pradar ) में बहुत  लाभ होता है.
     

    (21) leukorrhea home remedy - पके हुए दो केले घी और शक्कर के साथ खाने से कुछ सप्ताह में श्वेत प्रदर ( Leucorrhoea Shvet Pradar ) से मुक्ति मिलती है.
     

    (22) Leucorrhoea home remedies in hindi - गुलाब के फूलो को छाया में सुखाकर बारीक चूर्ण बनाये. ३ ग्राम चूर्ण सुबह शाम गाय के दूध के साथ सेवन करने से श्वेत प्रदर ( Leucorrhoea Shvet Pradar ) खत्म होता है.
     

    (23) Leucorrhoea ke gharelu nuskhe - अनार के छिलको को पीसकर जल में उबालकर उसको छानकर, उस उबले काढ़े में सूती कपडे को भिगो दे फिर उस कपडे को योनि पे रखे श्वेत प्रदर ( Leucorrhoea Shvet Pradar ) नष्ट होता है.
     

    (24) Leucorrhoea ka gharelu upchar - मुलहठी का चूर्ण १ ग्राम मात्रा में जल के साथ सुबह शाम सेवन करने से श्वेत प्रदर ( Leucorrhoea Shvet Pradar ) से मुक्ति मिलती है.
     

    (25) Leucorrhoea ka gharelu ilaj - शिरीष की चल का चूर्ण १ ग्राम मात्रा में घी मिलाकर सुबह शाम सेवन करने से श्वेत प्रदर ( Leucorrhoea Shvet Pradar ) ठीक हो जाता है.
     

    (26) Leucorrhoea drug treatment - बला की जड़ का चूर्ण बनाकर ३ ग्राम चूर्ण रोज शहद मिलाकर सेवन और दूध पीने से श्वेत प्रदर ( Leucorrhoea Shvet Pradar ) में बहुत लाभ मिलता है.
     

    (27) Leucorrhoea causes and home remedies - बड़ी इलायची, माजूफल को बराबर मात्रा में लेकर दोनों के बराबर मिश्री मिलाकर कूट-पीसकर चूर्ण बना ले. २ ग्राम चूर्ण सुबह, २ ग्राम चूर्ण शाम को जल के साथ सेवन करने से महिलाये श्वेत प्रदर ( Leucorrhoea Shvet Pradar )  रोग से मुक्ति पा सकती है.
     

    (28) Leucorrhoea treatment by ramdev - ककड़ी के बीज, कमल ककड़ी, जीरा और शक्कर बराबर मात्रा में मिलाकर २ ग्राम मात्रा में रोज सेवन करने से  २ ग्राम जीरे के बारीक चूर्ण को बराबर मात्रा में मिश्री मिलकर चावल के धोवन के साथ सेवन करने से श्वेत प्रदर ( Leucorrhoea Shvet Pradar ) में बहुत लाभ होता है.

    (29) Leucorrhoea ke gharelu nuskhe - श्वेत प्रदर ( Leucorrhoea Shvet Pradar ) की विकृति में चावल के धोवन के जल से बहुत लाभ होता है. चावल को तीन-चार घंटे पहले जल में डालकर रखे. फिर उन चावल को थोड़ा सा मसलकर जल छानकर पीने से श्वेत प्रदर ( Leucorrhoea Shvet Pradar ) ठीक हो जाता है.

    (30) Leucorrhoea ka ilaj - फिटकरी को जल में मिलाकर योनि में छिड़कने से श्वेत प्रदर ( Leucorrhoea Shvet Pradar ) में लाभ होता है.

    (31) Leucorrhoea ka upchar - नीम के पत्तो को जल में उबालकर उस जल को छानकर योनि साफ़ करने से श्वेत प्रदर ( Leucorrhoea Shvet Pradar ) के जीवाणु नष्ट होते है. अगर नीम के पत्ती न मिले तो डेटोल का उपयोग कर सकते है.

    (32) Leucorrhoea medical treatment - काली मिर्च, छोटी पीपल, कूठ, शतावर, सेंधा नमक और उरद सभी चेज़ बराबर मात्रा में पीसकर जल मिलाकर लंबी बत्ती बनाये. रात को सोते समय इस बत्ती को योनि में डालकर घुमाये इससे श्वेत प्रदर ( Leucorrhoea Shvet Pradar ) के जीवाणु नष्ट होंगे आपकी योनि साफ़ होगी.

    (33) leukorrhea natural remedies  - तिल को पीसकर चूर्ण बनाये. १० ग्राम चूर्ण मधु मिलाकर खाने से श्वेत प्रदर ( Leucorrhoea Shvet Pradar ) बहुत लाभ होता है.
    मुलहठी की जड़ का चूर्ण ५ ग्राम मात्रा में इतनी ही मिश्री मिलाकर हलके गरम जल के साथ सेवन करने से श्वेत प्रदर ( Leucorrhoea Shvet Pradar ) ठीक हो जाता है.

    (34) Leucorrhoea natural treatment - ताजे आंवले का रस निकालकर १० मिली की मात्रा में मधु मिलाकर सेवन करने से श्वेत प्रदर ( Leucorrhoea Shvet Pradar )  नष्ट होता है.

    (35) Leukorrhea natural cure - १० ग्राम मूली के कोमल, ताजे पत्तो का रस रोज पीने से श्वेत प्रदर ( Leucorrhoea Shvet Pradar ) रोग होता है.

    (36) Leucorrhoea patanjali medicine - गुलाब के फूलो की कोमल पंखुडियो लगभग ५० ग्राम मात्रा में मिश्री मिलाकर खाने से और फिर गाय का दूध पीने से श्वेत प्रदर ( Leucorrhoea Shvet Pradar ) रोग में बहुत लाभ होता है.
     (37) Leucorrhoea remedies - ३ ग्राम आंवले का चूर्ण और मधु मिलाकर रोज सेवन करने से श्वेत प्रदर ( Leucorrhoea Shvet Pradar ) की बीमारी खत्म हो जाती है.

    (38) Leucorrhoea treatment in hindi - गाजर का रस २०० ग्राम मात्रा में रोज पीने से श्वेत प्रदर ( Leucorrhoea Shvet Pradar ) रोग में बहुत लाभ होता है. गाजर के रस में ३० ग्राम चुकंदर का रस मिलाकर सेवन करने से श्वेत प्रदर ( Leucorrhoea Shvet Pradar ) का निवारण होता है.

    (39) Leucorrhoea treatment in ayurveda - नागकेसर को पीसकर बारीक चूर्ण बनाकर रखे. आधे ग्राम चूर्ण को प्रतिदिन मट्ठे के साथ सेवन करने से धीरे धीरे श्वेत प्रदर ( Leucorrhoea Shvet Pradar ) का निवारण होता है.

    (40) Leucorrhoea treatment medicine - अश्वगंधा का ३ ग्राम चूर्ण सुबह और शाम दूध के साथ सेवन करने से श्वेत प्रदर ( Leucorrhoea Shvet Pradar ) नष्ट होता है और शारीरिक शक्ति का विकास होता है.

    (41) Leucorrhoea treatment at home - अनार के कोमल पत्ते १० ग्राम और ७-८ दाने कालीमिर्च लेकर २०० ग्राम जल में देर तक उबाले. फिर जल छानकर पी ले. कुछ सप्ताह तक सेवन करने से श्वेत प्रदर ( Leucorrhoea Shvet Pradar ) ठीक हो जाता है.धीरे धीरे खत्म हो जाता है.

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