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    हाई ब्लड प्रेशर कण्ट्रोल करने के 39 आयुर्वेदिक नुस्खे HIGH BLOOD PRESSURE - HYPERTENSION KA DESI ILAJ

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                              उच्च रक्तचाप

    AYURVEDIC NUSKHE FOR HIGH BLOOD PRESSURE - HYPERTENSION

    What is High Blood Pressure Hypertension?

    क्या है हाइपरटेंशन या उच्च रक्त चाप? 

    हाइपरटेंशन या उच्च रक्तचाप, को  धमनी उच्च रक्तचाप भी कहते हैं, एक पुरानी चिकित्सीय अवस्था है  जिसमें धमनियों में रक्त का दबाव बढ़ जाता है। दबाव की इस वृद्धि के कारण, रक्त की धमनियों में रक्त का प्रवाह बनाये रखने के लिये दिल को सामान्य से अधिक काम करने की आवश्यकता पड़ती है। रक्तचाप में दो माप शामिल होती हैं, सिस्टोलिक और डायस्टोलिक, जो इस बात पर निर्भर करती है कि हृदय की मांसपेशियों में संकुचन (सिस्टोल) हो रहा है या धड़कनों के बीच में तनाव मुक्तता (डायस्टोल) हो रही है। आराम के समय पर सामान्य रक्तचाप 100-140 mmHg सिस्टोलिक (उच्चतम-रीडिंग) और 60-90 mmHg डायस्टोलिक (निचली-रीडिंग) की सीमा के भीतर होता है। उच्च रक्तचाप तब उपस्थित होता है यदि यह 90/140 mmHg पर या इसके ऊपर लगातार बना रहता है।इस अवस्था को हाइपरटेंशन या उच्च रक्तचाप कहते है। 

    Symptoms of High Blood Pressure Hypertension:-

        शरीर में रक्त का संचालन हृदय धमनियों द्वारा करता है। जब रक्त धमनी में जाता है तब उसकी दीवारें भी दबाव देकर रक्त संचालन में सहायता करती हैं कभी-कभी धमनी की दीवार मोटी होकर अपना लचीलापन नष्ट कर देती है, तब हृदय को अधिक जोर से दबाव डालकर रक्त भेजना पड़ता है। उस अतिरिक्त दबाव या चाप को रक्त चाप कहते हैं। 
    ब्लड प्रेशर बढ़ने के दुष्परिणाम-

    Affects of High Blood Pressure-Hypertension

     दिल का दौरा, दिल की धड़कन बन्द होना, मस्तिष्क का पक्षाघात (लकवा), गुर्दे बेकार होना, दृष्टिपटल में खराबी, मृत्यु। 

    Symptoms of High Blood Pressure Hypertension:-

    उच्च रक्तचाप के लक्षण-

     सिर-दर्द, जी मिचलाना व सिर चकराना, थकावट, सामान्य दद्र व पीड़ा, सामान्य से तेज हृदय व नाड़ी की धड़कन। उच्च-रक्तचाप अपने-आपमें बहुत बार कोई लक्षण नहीं दर्शआता। 35 वर्ष की उम्र के पश्चात् यदि उच्च-रक्तचाप हो जाए तो हृदय, नेत्र और गुर्दों की नियमित जाँच समय-समय पर होनी चाहिए। विषेषकर जब परिवार की उच्च रक्तचाप की पृष्ठभूमि हो या आप ऐसे वर्ग के हों, जहाँ तनावपूर्ण जीवन एक सामान्य बात हो। 

    Reasons of High Blood Pressure Hypertension:-

    उच्च रक्तचाप के कारण- 

     गुर्दें की खराबी, भावनात्मक तनाव, व्यस्तता, अषान्ति, आनुवंषिकता (वंष परम्परागत), अधिक वजन व मोटापा, अधिक धूम्रपान व मद्यपान।
        उच्च रक्तचाप हो तो चिकित्सक के
    परमर्षानुसार नियमित उपचार, भोजन व व्यायाम करें। सदैव संतुलित, नियमित, नियंत्रित व कम नमक वाले भोजन का सेवन करें। योगासन (वासन) लाभप्रद होता है। तनाव, क्रोध व चिन्ता से बचिए एवं शान्त जीवन व्यतीत कीजिए। 35 वर्ष से अधिक आयु होने पर समय-समय पर अपने रक्तचाप की जाँच करवाइये। रात्रि में नौ घण्टे भरपूर नींद लें। दिन में भोजन के बाद कुछ समय सोयें। उच्च रक्तचाप को कम करने के लिए दिन भर में आधे से एक ग्राम तक नमक लेें। हर सातवें दिन तरल भोजन (स्पुनपक कपमज) लें। पानी अधिक पीयें। नषीली चीजें न लें। डाॅ0 ईवेन्स की पुस्तक ‘कार्डियोजोजी’ में लिखा है कि साधारण ब्लडप्रेषर में औषधि चिकित्सा असन्तोषजनक एवं असफल प्रमाणित हुई है। डाॅ0 जेम्स सी थाम्पसन की पुस्तक ‘हाई एण्उ लो ब्लडप्रेषर’ में लिखा है कि उच्च रक्तचाप में दवाइयों द्वारा प्राप्त लाभ पर कदापि विष्वास नहीं किया जा सकता। वह अस्थाई ही होता है। होम्योपैथी के सिद्धान्तानुसार रोग की नहीं, रोगी की चिकित्सा करनी चाहिए। 

    Ayurvedic Treatment of High Blood Pressure Hypertension:-

    चिकित्सा- 
     उच्च-रक्तचाप High blood Pressure में पेट साफ रखें पेट साफ करने के लिए नीबू पानी, ईसबगोल, आँवले का रस, अंकुरित मूँग, मोठ, चना, सलाद अनिवार्य रूप से सेवन करने चाहिए।
    उपवास- इस रोग में उपवास लाभदायक है। सप्ताह में एक दिन उपवास करना चाहिए। उपवास में फलों, सब्जियों का रस लें।
        तम्बाकू, काॅफी, चाय, माँसाहार रक्तचाप में हानिकारक है।
    शवासन- सीधे लेट जायें। हाथ-पैर सीधे रखें। एडि़याँ मिली रहें। आँखें बन्द करके शरीर को बिल्कुल ढीला छोड़ दें। सोचना बन्द कर दें। ध्यान साँस पर रखते हुए साँस धीरे-धीरे लें। इससे पाँच मिनट में ही शान्ति और ताजगी मिलेगी। 


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    1- लौकी- लौकी का रस आधा कप, थोड़ा-सा पानी मिलाकर तीन बार नित्य पीने से लाभ होता है।

    2- केला- केले के तने का रस आधा कप दो बार नित्य पीने से बढ़ा हुआ रक्तचाप सामान्य हो जाता है।

    3- नीबू- हृदय की कमजोरी दूर करने हेतु नीबू में विषेष गुण है। इसके निरन्तर प्रयोग से रक्तवाहिनियों में लचक और कोमलता आ जाती है और इनकी कठोरता दूर हो जाती है। इसलिए हाई ब्लड प्रेषर जैसे रोग को दूर करने में नीबू उपयोगी है। इससे बुढ़ापे तक हृदय शक्तिषाली बना रहता है एवं हार्टफेल होने का भय नहीं रहता। कैसा भी ब्लड प्रेषर हो, पानी में नीबू निचोड़कर दिन में कई बार पीने से लाभ होता है। प्रातः एक नीबू का रस गर्म पानी में मिलाकर पीना हितकारी है।

    4- सेब- हाई ब्लड प्रेषर होने पर सेब खाने से लाभ होता है।

    5- तरबूज के बीज को चाय में सुखाये, २ चम्मच बीज कूटपीस कर एक कप उबले गर्म पानी में १ घ्नत बेगने दे फिर ठंडा होने पर हिलाकर चयन ले और पी जाये. इस प्रकार की चार खुराक रोज पिए काफी असर दर देसी इलाज है. अतिरिक्त दाब होने पर शायद शरीर पर शामक प्रबह्व डालकर रक्त वाहिकाओं के उत्तेजना को घटकर उनको सिकोड़ कर अतिरिक्त दबाव को घटा देता है.

    6- High blood Pressure वाले रोगियों के पैर के ताव्लो व हथेली पर मेहदी का लेप समय समय पर खुद से या दुसरो से लगवाना चाहिए एक अचूक देसी नुस्खा है.

    7- पपीता- उच्च रक्तचाप के रोगियों के लिए पपीता राम बाण औषधि है। उच्च रक्तचाप का रोगी प्रतिदिन प्रातः काल एक पपीते का सेवन करें तो कुछ ही दिनों में रक्तचाप की पीड़ा कम हो जाती है। इसे औषधि मान कर सेेवन करें।

    8- पुदीना- पुदीना निम्न एवं उच्च रक्तचाप का नियमन करता है, इसके लिए पुदीने की चटनी एवं रस का उपयोग किया जा सकता है। उच्च रक्तचाप से पीडि़तों को बिना चीनी एवं नमक डाले ही पुदीने का सेवन करना चाहिए। 
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    9- टमाटर- टमाटर रक्तचाप को घटाता है। टमाटर खायें, रस भी पी सकते हैं।

    10- आँवला- उच्च रक्तचाप, रक्त की गर्मी में आँवले का मुरब्बा प्रातः नित्य खाने से लाभ होता है। आँवला रक्त शोधक है। 

    11- पेठा- पेठा उच्च रक्तचाप से बचाता है।

    12- अरबी-  उच्च रक्तचाप अरबी खाने से कम होता है।

    13- टिण्डा- उच्च रक्तचाप को टिण्डा कम करता है। पेशाब लाता है।

    14- मालिश - नियमित रूप से मालिश  करने से ब्लड प्रेशर में सुधार आता है।

    15- चावल- लम्बे समय तक चावल खाते रहने से कोलेस्ट्रोल कम हो जाता है, बढ़ता नहीं है। रक्तचाप भी ठीक रहता है।

    17- बाजरे की रोटी शहद के साथ खाने से बवासीर, उच्च रक्त चाप व चर्म रोग में बहुत अधिक फायदा होता है.

    18- एक कप चुकंदर के रस में एक कप गाजर और आधा कप पपीते व संतरे का रास मिलकर दिन में दो बार पी ने से हाई ब्लड प्रेशर में बहुत फायदा होता है.

    18- पुदीना लो ब्लड प्रेशर और हाई ब्लड प्रेशर दोनों के बहुत फायदेमंद है. हम पुदीने का रस और चटनी दोनों ही उपयोग में ल सकते है. बस उच्च रक्त चाप में रोगी को बिना चीनी व नमक डाले ही पुदीने का उपयोग करना.

    20- चैलाई- चैलाई का रस ब्लडप्रेशर के रोगियों के लिए लाभदायक है। इसकी सब्जी भी खाई जा सकती है।

    21- छाछ- छाछ से रक्तचाप (ब्लडप्रेशरकी कमी या अधिकता) में लाभ होता है। 

    22- नीम- ब्लडप्रेशर में प्रातः 25 ग्राम नीम की पत्ती का रस लेना लाभदायक है। 
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    23- रूद्राक्ष- पंचमुखी रूद्राक्ष पहनने से लाभ होता है। 

    24- पुदीना- निम्न रक्तचाप के रोगी पुदीने की चटनी या रस में सेंधा नमक, कालीमिर्च, किशमिश  डालकर सेवन कर सकते हैं।

    25- रक्त चाप(Rakht chap) सामान्य रखने के लिए निम्बू का प्रयोग बहुत लाभकारी है. पानी में निम्बू निचोड़ कर दिन में कोइ बार पीने से बहुत अधिक फायदा होता है.

    26- प्याज, लहसुन व अदरक की सामान मात्र लेकर, इनका सेवन करना से  उच्च रक्त चाप (high blood pressure) में भीत लॉग बोटा है. तीनो का मिश्रित रास बहुत ही फएद मंद है  उच्च रक्त चाप (high blood pressure)में.

    27- प्याज का रस और शुद्ध शहद बराबर मात्रा में मिलकर रोजना २ चम्मच की मात्रा दिन में एक बार लेने से  उच्च रक्त चाप (high blood pressure) कंट्रोल में होता है.

    28- उच्च रक्त चाप (high blood pressure)के रोगी को पके पपीते खाना बहुत लाभकारी होता है .

    29- उच्च रक्त चाप (high blood pressure) मरीजों को सेंधा नमक साधारण नमक की जगह पर प्रयोग में लाना चाहिए.

    30- आधा किलो लहसुन को छीलकर ४-५ दिन तक तक धुप में सुख्ये फिर काँच की बरनी में रखकर आधा किलो शहद भरे की लहसुन उसमे दुगा रहे इस बरनी को १५ दिन तक धुप में रख दे. इसके बाद २-२ काली सुबह शाम खाकर एक कप दूध पिए. कुछ दिन तक ये उपाय करते रखने से  उच्च रक्त चाप (high blood pressure)या निम्न रक्त चाप(low blood pressure) दोनों ठीक हो जायेगे. आपका रखत चाप नार्मल हो जायेगा.

    31- गाजर- हर प्रकार का रकतचाप गाजर का रस 310 ग्राम और पालक का रस 125 ग्राम मिलाकर नित्य पीने से दूर हो जाता है। 

    32- शहद- उच्च रक्तचाप होने पर शहद शरीर पर शामक प्रभाव डालकर रक्त वाहिकाओं की उत्तेजना को घटाकर, उनको सिकोड़कर उच्च रक्तचाप को घटा देता है। 

    33- हाई ब्लड प्रेशर वाले रोगी को तरबूज के में रस में सेंधा नमक व काली मिर्च डालकर लेने से हाई ब्लड प्रेशर में आराम मिलता है.

    34- आँवला, सर्पगंधा और गिलोय के चूर्ण  बनाकर २ ग्राम पानी के साथ लेने से रक्तचाप कंट्रोल में रहता है.

    35- केले के तने का रस र्आधा आधा कप दिन में २ बार पीने से बढ़ा हुआ रखत चाप ठीक हो जाता है.

    36- हाई ब्लड प्रेशर  होने पर निम्बू व अदरक का रस और शहद - इस तीनो को मिलकर घोल ले. और इस घोल की १-१- चम्मच लेने से रखतचाप ठीक हो जाता है.इस देसी इलाज लम्बे समय तक प्रयोग में लाये.

    37- सुबह सुबह नाश्ते में एक गिलास टमाटर के रस में थोड़ा शहद मिलकर पिए.ये रक्त चाप काम करता है.

    38- मेहँदी- उच्च रक्तचाप वाले रोगियों को पैरों के तलवों और हवेली पर मेहँदी का लेप समय-समय पर करने से आराम मिलता है। 

    39- त्रिफला- त्रिफला चूर्ण दो चम्मच, मिश्री आधा छटाँक मिट्टी के बर्तन में रात को भिगो दें। प्रातः छानकर पीने से उच्च रक्तचाप में लाभ होता है। 
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    1- Tarbooj ke beej chaya me sukhaye, do spoon tarbooj ke beej ko koot peeskar ek cup uble garm pani me ek hour bhegne de. Thanda hone pr pani ko hilakar chaan le aur pee jaye. Is tarh usko day me 4 times piye high Blood Pressure se aram milega. Ye bhut asardae Ayurvedic nuskha hai.

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    8- Subah khali pet lehsun ko shahad le sath lene se high blood pressure mein bhut fayada hota hai.

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