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    कान के रोग- कान दर्द, बहन, बहरापन जैसे रोग को ठीक करने के 39 आयुर्वेदिक इलाज Kaan dard behna ilaj upchar upay

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    कान में होने वाली बीमारी 
    Kaan Me Hone Wali Bimari 

    कान में दर्द के कारण

    Kaan Me Dard Ke Karan

    (1) सर्दी लगने की वजह से कान में दर्द हो सकता है.
    (2) कान को  बार-बार कुरादने या खोदने से कान मे दर्द या Ear Pain हो सकता है.
    (3) कान मे पानी चले जाने से भी कान में दर्द होता है.
    (4) कान मे चोट या घाव होने से भी कान दर्द करता है.
    (5) अगर कान मे अधिक या ज्यादा गंदगी या खूट या मल हो जाने से भी कान दर्द हो जाता है या कान मे फुंसी होने भी कान दर्द करता है.
    (6) कान मे सूजन होने भी कान दर्द करता है.
    (7) कान छेदने से भी कान दर्द होता है.

    कान बहाने के कारण-

    Kaan Behne Ke Karan-

    (1) पुराना जुखाम या आपको लंबे से समय से जुखाम है तो आपका कान बहने लगता है.

    (2) अगर कान मे गंदा पानी चला जाए तो भी कान बहने लगता है.

    (3) खसरा की बीमारी होने भी कान बहता है.

    (4) बहुत ज्यादा खांसी आने पर या काली खाँसी होने से भी कान बहने लगता है. कान बहने या दर्द के भूत कारण हो सकते है पर नीचे लिखे कोई भी घरेलू देसी उपचार या इलाज अपना कर अपने कान दर्द या कान बहने को रोक सकते है.
    Kaan dard ilaj
    Kaan dard ilaj

    कान मे आवाज़ होने के कारण-

    Kaan me Awaaj Hone karan- 

    कान मे आवाज़ होने के कारण- कान मे आवाज़ होने के रोग मे कान मे गुन गुन या फस-फस या घंटिया बजने के आवाज़ आती है. दिमागी दुर्बलता के कारण, कान मे खुसकी होने पर, कान मे कीड़ा चले जाने से कान मे अजीब तरह की आवाज़ सुनाई देती है.

    कान के रोग के लक्षण 

    Kaan Ki Bimari Ke Lashan 

    (1) एक घंटे या उससे भी ज्यादा  समय तक कान में दर्द होना, कान से तरल पदार्थ का बहना या मवाद बहना

    (2) कान के दर्द के साथ बुखार भी आ जाना

    (3) कान के दर्द के साथ सिर दर्द होना आदि  कान के रोग के लक्षण होते हैं।

    कान के रोग या बहने या दर्द के दौरान क्या खाए ?

    Kaan Ke Rog ya Kaan ke baehne ya Kaan ke dard Me Kya Naa Khaye

    कान की समस्या में मरीज को ऐसे खान पान के सेवन से बचना चाहिए जो कि उसके कान के रोगों को जन्म देनेवाले कफ के दोष को उग्र रूप दे सकते हैं। कान के रोग में कुछ परेहज जरूर करने चाहिए-

    (1) खट्टी चीज़ों का, जैसे कि खट्टी दही और खट्टे फलों के सेवन से भी कफ का दोष बढ़ जाता है इसलिए खट्टी चीजो का प्रजा ज़रा भी न करे  है।

    (2) केले, तरबूज, संतरे और पपीता के सेवन से बचना चाहिए क्योंकि ये ठन्डे फल है इससे सर्दी आपके शरीर में बढ़ सकती है, जो आगे चलकर कान की समस्यों को बढ़ावा दे सकती है।

    (3) कान की समस्याओं के दौरान प्याज़, अदरक और लहसून का प्रयोग लाभकारी सिद्ध होता है। हल्दी भी अत्यधिक गुणकारी होता है, और इसे खान पान में मसाले की तरह प्रयोग करना चाहिए।

    (4) आपके कानो में गन्दा पानी न जाने पाये , इस बात का पूरा ध्यान रखें जिसके लिए आपको गंदे पानी में तैरने से या डुबकी लगाने से बचना चाहिए। अगर ऐसा करना जरुरी हो तो कान को किसी कवच से ढँक लिया करें।

    कान के रोगो के घरेलु उपचार 

    KAAN KE ROGO KE GHARELU UPCHAR

    कान में पानी भरना स्नान करते समय, तैरने पर, भीगने से कभी-कभी कान में पानी भर जाता है और पूरा बाहर नही निकलता। कान में पानी रह जाए तो-

    (1) तिल का तेल गर्म करके कान में डालें।

    (2) जिस कान में पानी भरा हो, उसी ओर के एक पैर पर खडे़ हो कर, उसी ओर सिर झुका कर कुछ देर कूदें। पानी बाहर निकल जाएगा।

    बहरापन

    Behrapan

    (3) लहसुन- लहसुन की आठ कलियों को एक छटाँक तिल के तेल में तल कर उसकी दो बूँद कान में टपकने से कुछ दिनों में कान का बहरापन ठीक हो जाता है।

    (4) सरसों का तेल- सरसों का तेल गर्म करके कान में डालने से बहरेपन में लाभ होता है।

    (5) बेल: कान के रोग के में बेल  का उपयोग बहुत फायदेमंद होता है, यह एक घरेलु उपचार है. बेल के पेड़ की जड़ को नीम के तेल में डुबोकर उसे जला दें और जो तेल इसमें से रिसेगा, वह सीधे कान में दाल ले या जितना आप कान में बर्दास्त कर सकते उतना गरम कान में डाले । इससे कान के दर्द और संक्रमण ठीक हो जायेगा.

    (6) तुलसी- तुलसी के पत्तों का रस गर्म करके कान में डालने से सुनने की गड़बड़ में लाभ होता है।
    कर्णनाद

    (7) कभी-कभी कान में सीटी बजने, भन-भन की आवाज होती रहती है। यह रात को अधिक सुनाई देती है। यह रोग यदि ठीक न हो तो धीरे-धीरे बहरापन उत्पन्न हो जाता है। कान में आवाज होना आसाध्य रोग माना जाता है, लेकिन निराष नहीं होकर निम्न उपचार करें- कान में होने वाली आवाज की ओर ध्यान ही न दें। मस्तिष्क की कमजोरी दूर करने वाली चीजें खायें।

    (8) लहसुन- कान बहने के लिए बताया गया प्रयोग कर्णनाद में भी लाभदायक है।

    (9) सरसों का तेल- सरसों का तेल गर्म करके कान में डालने से सर्दी से होने वाली कान की गुनगुनाहट मिटती है।

    (10) नीम: नीम  एंटी-सेप्टिक होता हैं, जो कान के संक्रमण को ठीक करता है  हैं जो कान में रोग या दर्द  पैदा करते हैं।

    अदरक के रस और प्याज़ के रस के प्रयोग से भी कान के दर्द को ठीक और ख़त्म करता है ।
    (11) सौंठ- एक चम्मच सौंठ में गुड़ और घी मिलाकर गर्म करें फिर प्रतिदिन दो बार खायें। उससे कान में साँय-साँय की आवाज ठीक होती है।
    सरसों का तेल-
    (12) सरसों का तेल गर्म करके कान में डालने से दर्द ठीक हो जाता है।

    (13) सरसों के तेल में लौंग जलाकर, तेल कान में डालने से लाभ होता है। कान में कीड़ा चला गया हो, कान में आवाज होती हो, बहरापन हो तो सरसों का तेल डालें। लाभ होगा।

    (14) सरसों के तेल में लहसुन उबाल कर छान लें। इसे कान में डालने से कान का दर्द, घाव, मवाद बहना ठीक हो जाता है।

    (15) प्याज के रस को भूनकर इसके रस को कान में डालने से राहत मिलती है।

    (16) नीम- नीम के पत्ते पानी में डालकर उबालें। इसकी भाप का बफारा देने से कान का मैल निकल जाता है, कान के दर्द में आराम होता है।

    (17) मेथी को गाय के दूध में मिलाकर उसकी कुछ बूँदें संक्रमित कान या जिस कान में दर्द है उसमे डालने से भी काफी आराम देता है और ठीक भी करता है।

    (18) तिल के तेल में तली हुई लौंग की कुछ बूँदें भी कान के दर्द को ठीक करती है.

    (19) ब्राण्डी- ब्राण्डी की बूँद कान में डालने से कान का असहनीय दर्द ठीक हो जाता है।

    (20) अदरक- सर्दी लगने, मैल जमने, फुन्सियाँ निकलने, चोटलगने से कान में दर्द हो तो अदरक के रस को कपड़े से छानकर गुनगुना गर्म करके तीन-चार बूँद डालने से दर्द ठीक हो जाता है। दर्द रहने पर थोड़ी देर बाद पुनः डाल सकते है।

    (21) तुलसी: तुलसी का रस हल्का गरम करके कान में डालने से भी कान के रोगों और दर्द में काफी असरदार है.

    (22) तुलसी- तुलसी के पत्तों का रस गर्म करके कान में डालने से दर्द ठीक हो जाता है। कान बहता हो तो लगातार कुछ दिन डालने से लाभ होता है।

    kaan behna ka ilaj

    (23) नीबू- प्रातः पानी में नीबू निचोड़ कर नित्य पीने से कान बहने में लाभ होता है।

    (24) लहसुन- एक कली लहसुन और 1 तोला सिन्दूर को एक छटाँक तिल्ली के तेल में डालकर आग में पकायें। जब लहसुन जल जाये तो तेल को छानकर शीषी भर लें। इसकी दो बूँद नित्य कान में डालने से मवाद आना, खुजलाहट, कर्णनाद आदि रोग नष्ट हो जाते है। लहसुन को सरसों के तेल में उबाल कर कान में टपकाने से कान का दर्द, जख्म, पीप बहना ठीक हो जाते है।

    (25) प्याज- कान में दर्द, कान में पीप और कान में शायें-शायें की आवाज हो और बहरापन होने पर प्याज के रस को थोड़ा गर्म करके 5-7 बूँद कान में डालने से लाभ होता है।

    kaan me kedha Ilaj-


    (26) सरसों का तेल- कान में कीड़ा चला गया हो तो सरसों के तेल को गर्म करके डालने से कीड़ा बाहर आ जाता है।

    (27) फिटकरी- कान में चींटी चली जाए, इससे कान में सुरसुरी हो तो फिटकरी को पानी में घोलकर कान में डालें।

    आयुर्वेदिक घरेलु उपचार कान दर्द और कान के रोगो के आयुर्वेदिक घरेलु उपचार

    Ear Pain (Kaan Dard) Ayurvedic Treatment Hindi


    (28) सरसों का तेल २० मिलि बोरिक एसिड ५ ग्राम. पहले सासरो का तेल गर्म करके इसमें बोरिक एसिड मिलिए और हल्का गर्म रहने पर कान में डेल. कान का दर चाहे जितने पुराने सालो का हो या या १० या १०० साल पुराण कान का दर्द हो ठीक हो जायेगा और था ही कान से आने वाली पीप या मवाद भी आना बंद हो जायेगा. इस नुस्खे को १५ दिन तक प्रोयोग करे.

    (29) मुलेठी को घी में मिलकर हल्का गर्म करके कान में आसपास लेप करे कान के दर्द में रहत मिलेंगे.

    (30) अरंडी के पतों को गर्म तिल-तेल में डुबोकर दर्द वाले कान के आस पास सेकई करे.

    (31) सरसों के तेल में अदरक का रस मिलकर गुगुणा करे. फिर उसकी कुछ बुँदे दर्दयुक्त कान में डाले जरूर रहत मिलेगी.

    (32) गोंद के पतों का रस गुगुना करके कान में डाले. कर्णशूल मतलब कान के दर्द में आराम मिलेगा. थोड़ा हिंदी आप मजबूत करिये हिंदी हमारी राष्ट्र भाषा है.

    (33) कान में मवाद या पीप आने पर गुग्गुल का धुँआ कान पे ले या कान के अंदर जाने दे पीप आना बंद हो जाएगी.

    (34) नीम के पतों को पानी में उबले और उस पानी से कान को साफ़ करे. इसके बाद निबोली का तेल ग्राम करके उसकी २-४ बुँदे दिन २ बार कान में डाले. कान की खुजली में रहत मिलेगी या मिलती है.

    (35) प्याज को गर्म करके राख में भूनकर उसका रास निचोड़कर कान में डाले दर्द में आराम मिलेगा.

    (36) एक काली लहसुन एक तोला सिंदूर को एक १ ग्राम तिली के तेल में डालकर पकाये. जब लहसुन जल जाये तो तेल को छानकर शीशी में भर ले. इसकी २ बून्द रोज कान में डाले कान सभी रोगो में आराम मिलेगा.

    (37) लहसुन मूली और अदरक का रास मिलकर हल्का गर्म करके कान में बून्द बून्द डालने से  कान में पाकी हुई फुंसी ख़त्म हो जाती है.

    (38) पुदीने का रस कान में डालने से कान के कीड़े मर जाते  है.

    (39) भुनी हुई फिटकरी चावल भर की मात्र में डालने बाद ऊपर से निम्बू का रस डालने से कान कर दर्द तुरंत बंद हो जाता है.

    Kaan Dard Hone ke Karan 

    (1) Kaan me sardi lagne ki vajah se kaan me dard ho skta hai

    (2) kaan ho bar-bar kuradne ya khodne se kaan me dard ya ear pain ho sakta hai.

    (3) kaan me pani chale jane se bhi Earache hota hai.

    (4) Kaan me chot ya ghav hone se bhi Kaan dard karta hai.

    (5) Agar Kaan me adhik ya jada gandgi ya Khoot ya mal ho jane se bhi Earache ho jata hai ya kaan me fhunsi hone bhi kaan dard karta hai.

    (6) Kaan me sujan hone bhi kaan dard karta hai.

    (7) Kaan chedane se bhi kaan dard hota hai.

    Kaan Behane Ke Karan- 

    (1) Purana jukham ya apko lambe se samay se jukham hai to apka kaan behne lagta hai.

    (2) Agar Kaan me Ganda pani chala jaye to bhi Kaan Bahne lagta hai.

    (3) Khasra ki bimari hone bhi Kaan behta hai.

    (4) Bhut jada Khansi ya Kali khansi hone se bhi Kaan bahne  lagta hai. Kaan behne ya dard ke bhut karan ho skte hai par neeche likhe koi bhi gharelu desi upchar ya ilaj apna kar apne kaan dard ya kaan behne ko rok skte hai.

    Kaan me Awaj Hone ke Karan-

    Kaan me awaj hone ke roj me Kaan me Gun-Gun ya fas-fas ya Ghantiya bajne ke awaj ati hai. Diamgi Durbalta, Kaan me khuski, kaan me Keda chale jane se kaan me ajeeb tarh ki awaj sunai deti hai.

    Kaan mein paani bharna

    Snaan karte samay, taairne per, bheegne se kabhi-kabhi kaan mein paani bhar jata hai aur pura bahar nahi nikalta. Kaan mein paani reh jaaye to-

    (1)    till ka tail garam karke kaan mein daale.

    (2)    jish kaan mein paani bhara ho, usi or ke ek pair per khade ho ker, usi or sir jhuka ker kuch der kooden. Paani bahar nikal jaayega.

    Behrapan-     

    (1) Lehsun-      lehsun ki 8 kaliyoun ko ek chatank till ke tail mein tal ker uski 2 boond kaan mein tapakne se kuch dino mein kaan ka behrapan theek ho jata hai.

    Sarshon ka tail-   Sarshon ka tail garam karke kaan mein daalne se behrepan mein laabh hota hai.

    Tulsi- Tulsi ke patto ka rass garam karke kaan mein daalne se sunne ki gadbad mein laabh hota hai.

    (2)Karnnaad-  Kabhi-kabhi kaan mein seeti bajne, bhan-bhan ki aawaz hoti rehti hai. yeh raat ko adhik sunaai deti hai. yeh rog yadi theek na ho to dheere-dheere behraapan utpann ho jata hai. kaan mein aawaz hona aashadhy rog maana jata hai, lekin niraash nahi hoker nimnn upchaar karen- kaan mein hone wali aawaz ki oar dhyan hi na dein. mastishk ki kamjori door karne waali cheezen khayen.

    (3) Lehsun-      kaan behne ke liye bataya gaya prayog karnnaad mein bhi labhdayak hai.

    Sarshon ka tail-   Sarshon ka tail garam karke kaan mein daalne se sardi se hone waali kaan ki gungunahat mitati hai.

    (4) Sauth-        ek chammach sauth mein gud aur ghee milaker garam karen phir pratidin do baar khayen. Usse kaan mein saayen-saayen ki aawaz theek hoti hai.

    Kaan ke rog-

    Kaano mein paani jaane se, chot lagne, tez aawaz se, kaan mein maail jamne se, mitti jane se, kuredne se, funshi hone se, thand lagne se, keeda-makoda gushne se anek rog paida hote hai.

    Kaan mein dard-

    Kabhi-kabhi kaan mein bhyanak tez dard hota hai. yeh thand lagne, chot lagne, funshi hone se hota hai. karad ka pata lagakar chikitsah karni chahiye.

    (1) Sarshon ka tail-   (1)  Sarshon ka tail garam karke kaan mein daalne se dard theek ho jata hai.

    (2)  Sarshon ka tail mein laung jalaker, tail kaan mein daalne se labh hota hai. kaan mein keeda chala gaya ho, kaan mein aawaz hoti ho, behrapan ho to sarshon ka tail daalen. laabh hoga.        

    (3) Sarshon ke tail mein lehsun ubaal ker chaan le. Ishe kaan mein daalne se kaan ka dard, ghaav, mavaad behna theek ho jata hai.

    (4)  pyaaz ke rass ko bhoonker ishke rass ko kaan mein daalne se rahat milti hai.

    (2) Neem-  neem ke patte mein daalkar ubalen. Ishki bhaap ka bafara dene se kaan ka maail nikal jata hai, kaan ke dard mein 
    aaram hota hai.

    Barandi-  barandi ki boond kaan mein dalne se kaan ka aashniya dard theek ho jata hai.

    (3) Adrak- sardi lagne, maail jamne, funshiyan nikalne, chot lagne se kaan mein dard ho to adrak ke rass ko kapde se chaankar gungunaa garam karke teen-baar boond daalne se dard theek ho jata hai. dard rehne per thodi der baad punah daal sakte hai. 

    (4) Tulsi-         tulsi ke patton ka rass garam karke kaan mein dalne se dard theek ho jata hai. kaan behta ho to lagataar kuch din daalne se labh hota hai.

    Kaan behna- 

    (1) Neembu-   pratah paani mein neembu nichodker nitya peene se kaan behne mein labh hota hai.

    (2) Lehsun-   ek kali lehsun aur 1 tola sindoor ko ek chatank tilli ke tail mein daalkar aag mein pakayen. Jab lehsun jal jaye to tail ko chaanker seeshi bhar le. Ishki do boond nitya kaan mein daalne se mavaad aana, khujlahat, karnnad aadi rog nasth ho jate hain. lehsun ko sarshon ke tail mein ubal ker kaan mein tpakane se kaan ka dard, jakhm, peep behna theek ho jaate hain.

    (3) Pyaaz-   kaan mein dard, kaan mein peep aur kaan mein saayen-saayen ki aawaz ho aur behrapan hone per pyaaz ke rass ko thoda garam karke 5-7 boond kaan mein dalne se labh hota hai.

    Kaan mein keeda

    (1) Sarshon ka tail- kaan mein keeda chala gaya ho to sarshon ke tail ko garam karke dalne se keeda bahar aa jata hai.

    (2) Fitkari-  kaan mein cheeti chali jaaye ishse kaan mein sursuri ho to fitkari ko paani mein gholker kaan mein daale.

    Kaan dard ke gharelu nuskhe, upay, ilaj, nuskhe| Ear Pain Treatment hindi

    1) kan dard ka gharelu ilaj- Kaan me dard aur Kaan me kedhe ho to baigan jalaye aur uski dhuni kaan me de. Sare kedhe bahar aa jayege.

    2) Kaan behne ka ilaj-  3-7 din puran gaay ka mutra chaankar shishi me rakhkar dhakkan band kar de. Roj kaan saaf kare 3-4 bund bahne vale me kaan me dale, rogi ka kaan behna band ho jayega.

    3) Kan ke Rog aur Upchar- Metti ke katore (sakore) me khud ka mutra ya peshaab gram kar le. Kunkuna gram rahe tab droper se dono kano me 3-4 bund tapkar rui rui se kaan band kar de. Lagatar kuch is upchar karne se Kan ya Kaan ke rog jaise- Kaan me dard, kan pahna aur behna, peep ana, kam sunai dena ya phir kuch na sunai dena, ye sabhi kaan ki bimari thik ho jati hai.

    4) kaan dard ke gharelu nuskhe- Kaan Dard ho, kaan Kaan bahta ho, 10-12 gram sarso ka tel aur ek choti shishi amratdhara ki milakar achi trah band karke rakhe. Jab dard ho to 4-5 dunde kaan me dalne se turant araam milta hai.

    5) Kaan dard ki dawa- Gawarpathe ke gude ka ras nikalkar aag par gram kar le. Kunkuna gram rahe tab jis kaan me dard ho uski dusri traf ke kaan me 2 bund ras tapkane se Kaan dard (Ear Pain) thik ho jata hai.

    6) Kaan me dard ka ilaj in hindi- Gulab ki pattiyo ke taje swras ki kuch bunde kaan me tapkane se kaan me dard thik ho jata hai.

    7) kaan ka behna in hindi- Laal Mirch ke beej hath me hi paani daalkar masalkar vahi pani kaan me tapkaye. Ye Kaan Dard Ka Nuskha Lagega to sahi par Kaan dard (Ear Pain) jarur bhag jayega.

    8) kaan ki bimari Ka ayurvedic upchar- Sudarshan ke patte par zara sa ghee lagakar use gram kare, phir uska ras kaan me tapkane se kaan ka dard turant band ho jata hai.

    9) kaan ke dard ka ilaj- Istri (Women) ke dudh ki 3-4 bunde roj kaan me tapkne se kaan dard va kaan ke ghav thik ho jata hai.

    10) kaan dard ke gharelu upay- Yadi  Kaan me dard ho to kaan me ghee ki 2-3 bunde tapkaye.

    11) kaan dard ka gharelu ilaj in hindi- Raat ko sone se pahle pyaj ke taja ras ki bunde kaan me tapkakar 2 min. baad baha de phir iske bad fuli fitkari burak de kaan dard thik ho jayega.

    12) kaan ki bimari in hindi- Kaan ki bimari me sarso ka tel 10 gram me fuli fitari 5 gra, aur jara se pishi hui haldi milakar paka le. 2-2 bunde kano me tapkakar rui ki daat lagakar so jaye. 3-4 din me kaan thik ho jayege.


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