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    मंगलवार, 29 मार्च 2016

    कुष्ठ रोग के आयुर्वेदिक उपचार kusht rog , kodh, leprosy, Gout, Leprasi Treatment

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    कुष्ठ KUSHT ( LEPROSY) एक संक्रामक रोग है, जो अन्य संक्रामक रोगों की तरह एक जीवाणु “माइक्रोबैक्टिरियम लेप्री के द्वारा फैलता है. कुष्ठ KUSHT ( LEPROSY) रोग पूर्व जन्म के पापों का फल नहीं है और ना ही यह लाइलाज़ है. कुष्ठ KUSHT ( LEPROSY) का प्रसार तो वायु या जल के माध्यम से होता है और ही यह वंशानुगत है. आज भी कुछ अल्प ज्ञानी कुष्ठ KUSHT ( LEPROSY) को वंशानुगत मानते है. मैंने भी कुछ वेबसाइट पे वंशानुगत कहते सुना है पर ये एक दम गलत है.
    Kusth Rog Ka Gharelu Upchar
    Leprosy Treatment hindi

     कुष्ठ KUSHT ( LEPROSY) वंशानुगत नहीं होता है. यदि कुष्ठ KUSHT ( LEPROSY) रोगी के बच्चों को शुरू से ही उनसे दूर रख जाये तो रोग का प्रभाव संतान पर नहीं पड़ता है. कुष्ठ KUSHT ( LEPROSY) रोग रोगी के दीर्घकालीन घनिस्ट सम्पर्क में रहने से कुष्ठ KUSHT ( LEPROSY) रोग से संक्रमित हो सकता है. यह सम्पर्क तवच का त्वचा से अथवा रोगी के द्वारा पहने जाने वाले कपडे पहनने से और रोगी के प्रयक्त बर्तन में खाने से फली सकता है.प्रौढ़ों की तुलना में छोटे बच्चों में जल्दी फैलता है कुष्ठ KUSHT ( LEPROSY) रोग. रोगी के सम्पर्क में आने के से साल तक की अवधि में स्वस्थ इंसान में कुष्ठ KUSHT ( LEPROSY) रोग विकसित होता है. कुष्ठ KUSHT ( LEPROSY) रोग किसी भी अवस्था में पूरी तरह ठीक हो जाता है। यह बात अलग है कि आरंभिक अवस्था में इसका उपचार आसानी से हो जाता है। चरमावस्था में इस रोग के कारण शरीर में कई प्रकार की विकृतियां उत्पन्न हो जाती हैं।


    Kusht rog Lashan- leprosy Symptoms Hindi

     कुष्ठ KUSHT ( LEPROSY) रोग ROG में शरीर की त्वचा पर एक या एक से अधिक चकत्ते बन जाते है अथवा त्वचा पर कभी भी चकत्ते पड़े बिना शरीर का कोई भाग सवेदनशील हो जाता है. चकत्ते त्वचा के रंग की अपेछा अधिक पीले या लाल होते है. चकत्ते में खुजली, जलन अथवा दर्द होने लगती है.
    चकत्ते पीठ, नितंम्ब, जांघ, अथवा शरीर के किसी अन्य भाग पर बन सकते है. शुरआत में त्वचा के रंग बनवत में साधारण सा दिखता है. गहरे रंग की त्वचा में तो यह परिवर्तन - दाल तक बिलकुल भी दिखाई नहीं देता है. कुष्ठ KUSHT ( LEPROSY) रोग ROG यह प्रकार कुष्ठ KUSHT ( LEPROSY)  की प्रारंभिक अवस्था है  प्रारंभिक अवस्था में भी संक्रमण होता है. कुष्ठ रोग (KUSHT ROG) या कुष्ठ (KUST) एक रोगाणु के कारण होता है। यह भी तपेदिक (टी.बी), पोलियोमायलिटिस, डिप्थेरिया आदि की तरह ही संचरणक्षम (संक्रामक-दूसरों को लगनेवाला) रोग है परंतु बहुत ही कम फैलनेवाला है। केवल ऐसे संक्रामित कुष्ठ रोगी जिनका बहुत दिनों से उपचार न हुआ हो उसके संपर्क में आने से कुष्ठ(kUSHT) फैल सकता है।
    कुष्ठ KUSHT ( LEPROSY) रोग ROG की विकसित अवस्था के लक्षण - कुष्ठ KUSHT ( LEPROSY) रोग ROG मंद गति से विकसित होता है. इसलिए कई साल बाद कुष्ठ KUSHT ( LEPROSY) निकलता है इसके फलस्वरूप शरीरिक विकृतियाँ प्रकट होती है. कुष्ठ KUSHT ( LEPROSY) रोग ROG प्रारंभिक अवस्था में उपचार नहीं होता है कुष्ठ KUSHT ( LEPROSY) रोग ROG  रोग ROG विकसित हो जाता है. और जल्दी जल्दी नए चकत्ते बनते जाते है.
    कोहनी, घुटने, टखने और कलाई के चारो और त्वचा के नीचे की नसे भी रोग्रस्त हो जाती है. इसके अतरिक्त कान, नाक, आँख भी कुष्ठ KUSHT ( LEPROSY) रोग ROG  की चपेट में जाते है. कुष्ठ KUSHT ( LEPROSY) रोग ROG की संक्रमशीलता को काम करने और कुष्ठ KUSHT ( LEPROSY) रोग ROG का उपचार करने की एक से अधिक या भुत सी महत्वपूर्ण दवा उपलब्ध है. अतः कुष्ठ KUSHT ( LEPROSY) रोगी को इसका इलाज करवाकर पूर्ण स्वस्थ हो सकता है.
    कुष्ठ रोग के संबंध में गलत तथ्य
    (1) कुछ लोगों का विश्वास है कि वंशानुगत कारणों, अनैतिक आचरण, अशुद्ध रक्त, खान-पान की गलत आदतें जैसे सूखी मछली, पूर्वपापकर्म आदि कारणों से कुष्ठ रोग होता है।
    (2) लोग मानते हैं कि कुष्ठरोग केवल कुछ ही परिवारों में फैलता है। यह केवल स्पर्शमात्र से हो जाता है।
    (3) कुष्ठ रोग प्राय: कुरूपता के साथ जुड़ा हुआ होता है। कुरूपता आने के बाद ही कुष्ठ रोग का निदान किया जा सकता है।
    (4) कुष्ठ रोग अत्यंत संक्रमणशील है एवं यह संक्रमणशीलता कुरूपता से जुड़ी हुई है।
    कुष्ठ रोग लाइलाज है।
    (6) जिन परिवारों में कुष्ठ रोगी हैं, उस परिवार के बच्चों को कुष्ठ रोग होगा ही।

    Kusth Rog Ke Gharelu Nuskhe| Kodh Ke Upchar



    (1) कच्चा बथुआ साफ़ धोकर एल किलो रस निकल ले .२५० ग्राम सरसो या टिल के तेल , पकने रख दे. धीमी आंच पर तब तक खौलते रहे जब तक तेल शेष रह जाये.बथुआ उबालकर सहते गरम पानी से कोढ़ (KODH) ग्रस्त अंगो को धो ले. अब ऊपर बनाया तेल लगाए . खाने में बथुआ का साग खाये, नमक डेल, बथुआ का रस पिए. १०० दिन में आप खोद से छुटकारा पा जाएंगे.
    (2) कोढ़ (KODH) का कारण है- दो विरोही पदार्थो का सेवन. जैसे मछली खा कर दूध पीना, घी और शहद बराबर खा लेना. १०० ग्राम फिटकरी पीसकर तवे पर भस्म बन ले. एक चमम्च शहद में सो रत्ती फिटकरी मिलकर गाजर-मूली के रस में पीना शुरू कर दे. १०० ग्राम गंधक  सुध करके बराबर मात्र में फूली फिटकरी और नीम के तेल में घोटकर कड़वे तेल में पकए. जब गाढ़ी गोंड की तरह बन जाये तो इसका लेप कुष्ठ के त्वचा पर करे. से घंटे में नीम के पानी से धो डाले और फिटकरी के पानी से नह ले. कहते, मिर्च-मसाले, तेज नमक, मिल की चीनी, चाय, कॉफ़ी, शराब और चरस गांजा से परहेज करे.
    (3) एक चमम्च आंवला के चूर्ण की सुबह शाम फंकी लेने से कुष्ठ रोग (KUSTH ROG) ठीक होता है.
    (4) कोढ़ (KODH) के घाव पर अनार के पत्तो को पीसकर लगने से बहुत जादा फायदा होता है.
    (5) परवल, जिमीकन्द की सब्जी लगातार लम्बे समय कहते रहने से कुष्ठ रोग (KUSTH ROG) ठीक होता है.
    (6) अंकुरित चना लगातार सुबह साल तक खाते रहने से कुष्ठ रोग (KUSTH ROG) में बहुत फायदा होता है.

    (7) ८ ग्राम हल्दी की फंकी सुबह शाम दो बार ले. हल्दी की गांठ को पत्थर पर पानी में घीसकर लगए कुष्ठ रोग (KUSTH ROG)  में आराम मिलेगा. कुछ दिन तक रोज सेवन करने से कोढ़ (KODH) रोग थी हो जाता है.
    (8) तुलसी के पत्तो को खाने से कुष्ठ पे मलने से कोढ़ (KODH) रोग ठीक हो जाता है.
    (9) १०० ग्राम आक का दूध, १०० ग्राम कनेर की जड़ की छाल, १०० ग्राम मीठा लेलिया घोट-पीसकर, १०० ग्राम तिल ले तेल में पकए. लीटर गो-मूत्र(तब के बर्तन में) भी इसी में मिलकर मंडी आंच में पकाए. जब तेल शेष रह जाये तो बोतल में भर ले. इस तेल की मालिश से कोढ़ (KODH) रोग ठीक हो जाता है.
    (10) नीम और चालमोगरा का तेल सामान मात्र में मिलकर कुष्ठ रोग (KUSTH ROG)  पर लगाए.

    Leprosy-Kusth Rog Treatment Hindi

    (1) एक हंडिया ले, जिसमे एक नीचे छोटा सा होल कर दे. एक गधा होकर उसमे नीचे एक कटोरी रख कर ऊपर से हंडिया रख दे. कटोरी होल के नीचे हो. सिरस के बीज हांड़ी में डाले और हांड़ी के चारो तरफ उपलों का अलाव जल दे. हांड़ी का मुंह अछि तरह बंद कर दे. हांड़ी ग्राम होगी और उन बीजों में से तेल निकल कर कटोरी में जायेगा. इस तेल की मालिश से सफेद्द कोढ़ (KODH) ठीक और रुक जाता है. त्वचा (TWACHA)का रंग बदलने लगता है. कुछ समय बाद त्वचा (TWACHA)का रंग सामान्य हो जाता है.

    (2) जिस कोढ़ (KODH)  से पानी आता हो, अंग साद जाये हो उसमे सिरसा की छाल कप पानी से घिसकर लगाए. अगले दिन हिरोल मिले पानी से घाव को दाफ करे और वह लेप फिर लगए.नयी त्वचा (TWACHA) फिर लगाए.
    (2) त्वचा (TWACHA)को नीम के उबले पानी से धोकर धहद का लेप लगने से कुष्ठ रोग (KUSTH ROG) ठीक हो जाता है.
    (3) गलित कोढ़ (KODH)  हो तो नीम के पत्तो आँवला लप २५-२५ ग्राम लेकर कूट पीसकर चं ले. १० ग्राम की फंकी लेकर शहद चाट ले कुष्ठ रोग ठीक हो जायेगा.
    (4) कुष्ठ रोग (KUSTH ROG)   से परेशान इंसान को मकोय के पत्तो का कल्क बनाकर, उस पर नियमित लेप करने से कुष्ठ रोग (KUSTH ROG)   ठीक हो जाता है.
    (5) बबूल की टोला छाल लेकर क्वाथ बनाए. उसे रातभर रख रहने दे. सुबह उस पानी को निथर पर पीन से कुष्ठ रोग (KUSTH ROG)   बहुत जादा फायदा होता है.
    (6) तुलसी की जड़ और सोंठ का चूर्ण गरम पानी में लगातार लेने से कुष्ठ रोग (KUSTH ROG)   ठीक हो जाता है.
    (7) तुलसी की २५० गरम पत्तो को पानी के साथ पीसकर रस निकल लीजिए. २५० ग्राम टिल के तेल में उपरोक्त रस डालकर उबाले. रस जाल जाने पर तेल को छानकर बोतल में भर लीजिए. इस तेल की मालिश कोस्ट रोग पर करे, साथ ही सुबह काल तुलसी की जड़ और सोंठ का चूर्ण को गुनगुने पानी के साथ पीने से कोढ़ (KODH)  जैसा भयंकर रोग भी दूर हो जाता है.
    (7) तुलसी की पत्तियों से स्वरस में सफ़ेद शक्कर मिलकर पींसे कुष्ठ रोग (KUSTH ROG)   में बहुत लाभ होता है.
    (8) तुलसी की जड़ का महीन चूर्ण बनकर पान की गिलोरी में भरकर खाने से अधोगामी गलित कुष्ठ रोग (KUSTH ROG)   ठीक हो जाता है.
    (9) तुलसी का स्वरस, घी, चुन और नागरबेल के पत्तो का स्वरस मिलकर, घोटकर लगने से गलकर्ण कुष्ठ रोग (KUSTH ROG)   ठीक होता है.
    (10) कुष्ठ रोग (KUSTH ROG)   प्राम्भ होते ही तुलसी की पत्तियों को शहद के साथ नियमित रूप से सेवन करने से  कोस्ट रोग नहीं बढ़ता है. और धीरे धीरे करके कुष्ठ रोग (KUSTH ROG)   ठीक हो जाता है.
    (11) पुराने कुष्ठ रोग (KUSTH ROG)   में तुलसी की पत्तियों का रस थोड़े से  गौ-मूत्र के साथ मिलकर सुबह शाम पिए और उसी की मालिश करे. एक वर्ष तक नियमित करे. कुष्ठ रोग (KUSTH ROG)   ठीक हो जाता है. 
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