• Latest News

    Gharelu Upchar. Blogger द्वारा संचालित.
    बुधवार, 27 अप्रैल 2016

    Pregnancy tips- maa banne se pahle ki tayari- जाने माँ बंनाने की पहले की तयारी

                                                        बच्चा प्लान करने से पहले

    माँ  बनने का निर्णय सिर्फ एक स्त्री का या सिर्फ उसके पति का ही हो अथवा उसके समस्त परिवारजनों की सहमति हो, आज यह एक गम्भीर  है। यदि गर्भाधारण से लेकर  शिशु जन्म तक की समस्त स्थितियों को सही पाया जाय, तो कोई भी स्त्री माँ बनने का निर्णय ले सकती है।
        माँ बनना एक सुखद अनुभूति है, लेकिन उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी भी। अतः आवष्यक है कि विवाह के बाद पति-पत्नी आपस में विचार-विमर्ष करके ही बच्चा प्लान करें। माँ का शरीर एक ऐसी क्यारी है, जहाँ बच्चे का बीज रोपित किया जाता है और भरपूर खाद-पानी देकर इस बीज को विकसित किया जा सकता है। आजकल महिलायें भी नौकरी-पेषा हैं। अतः जब बच्चा प्लान करें, तो यह देख लें कि आप उसको समय दे पायेंगी ? इसके अलावा प्रष्न आता है, कि पति-पत्नी के विवाह के बाद आपस में ही सेटिंग नहीं हो पाई, ऊपर से महिला गर्भवती हो गई। ऐसे में कई महिलायें गर्भपात कराने डाॅक्टरों के चक्कर लगाने लगती हैं। सवाल यह उठता है कि शारीरिक रूप से एक महिला अपने आपको गर्भधारण के लिए कैसे तैयार करें। किन-किन बातों का ध्यान रखे ताकि उसे जो बच्चा हो, तो वह पूर्ण हो, ज्ञानवान हो, वह स्वस्थ और सुन्दर हो।

               
                                                                    स्वयं को परखें
       
    स्वयं को परखने का अर्थ स्वयं के शरीर व उसकी क्रिया को जानने से है, वैसे तो शरीर का सामान्य ज्ञान सभी को होना चाहिए पर प्रजनन का ज्ञान हर स्त्री-पुरुष के लिए आवष्यक है, खासकर उन्हें जो वैवाहिक सूत्र में बँधने जा रहे हों, या बँध चुके हों, हमारे देष में कैरियर में विष्वास रखने वाले षिक्षित, स्मार्ट, आधुनिक युवा भी प्रजनन के विषय में बहुत सीमित जानकारी रखते हैं। सेक्स और प्रजनन से जुड़ी स्वास्थ्य समस्या उत्पन्न होने के बाद ही लोग जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं। कुछ दिन पहले दफ्तर में कार्यरत महिलाओं हेतु आयोजित एक स्वास्थ्य कार्यक्रम में एक सहज सवाल पूछा गया कि मासिकधर्म क्यों व किस प्रकार आता है ? मगर कोई भी इसका उत्तर नहीं दे पाई।
        मसिकधर्म, एमसी या पीरियड रजोकाल में हर माह होने वाली एक हारमोन नियंत्रित क्रिया है। हर माह 4-5 दिनों का रक्तस्त्राव रुकने के साथ-साथ  जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं। कुछ दिन पहले दफ्तर में कार्यरत महिलाओं हेतु आयोजित एक स्वास्थ्य कार्यक्रम में एक सहज सवाल पूछा गया कि मासिकधर्म क्यों व किस प्रकार आता है ? मगर कोई भी इसका उत्तर नहीं दे पाई।
        मसिकधर्म, एमसी या पीरियड रजोकाल में हर माह होने वाली एक हारमोन नियंत्रित क्रिया है। हर माह 4-5 दिनों का रक्तस्त्राव रुकने के साथ-साथ गर्भाषय की अंदरूनी परत क्रमषः मोटी व परिवर्तित होती रहती है। 4 सप्ताह के अंत में यह अपने आप बिखर जाती है जिससे रक्तस्त्राव होता है, जो योनि मार्ग से बाहर आता है, जिसे हम एमसी या मसिकधर्म कहते हैं। कन्या में मसिकधर्म नियमित होना यह दर्षाता है कि उसके प्रजनन अंगों की रचना व क्रिया सामान्य है। मसिकधर्म में होने वाले हारमोन के परिवर्तन प्रतिमाह अंड का फलीकरण, विकास व विमोचन भी करते हैं। इस सम्पूर्ण क्रिया का लक्ष्य गर्भाधान होता है, जब गर्भ ठहर जाता है, तो गर्भाषय में विकसित मोटी परत गर्भ की सुरक्षा व पोषाहार प्रदान करने के काम आती है, इसके बाद मसिकधर्म रुक जाता है।
        गर्भधारण करना स्त्री के शरीर में पूर्ण विकसित व विमोचित अंड के शुक्राणु से मिलाप के कारण होता है। पुरुष के साथ सहवास अर्थात् संभोग के कारण शुक्राणु वीर्य के माध्यम से स्त्री के शरीर में पहुँचते हैं, जिस महिला में माहवारी नियमित है उसके शरीर में अंडविमोचन क्रिया मध्य मासिक यानी 14 वें दिन के आसपास होती हैं, अंडविमोचन के 13 वें से 18 वें दिन के दौरान सहवास करने से गर्भ ठहरने की संभावना रहती है, अंडविमोचन की जानकारी गर्भ को रोकने या गर्भधारण हेतु कोषिष करने दोनों में उपयोगी हैं।       
               
                                                हमारा यौन जीवन
    यह अत्यंत निजी होने के साथ-साथ एक मूलभूत विषय है। परन्तु हमारी विडंबना यह है कि इतना महत्वपूर्ण होते हुए भी इसका ज्ञान हमें परिवार या षिक्षा पाठ्यक्रम के माध्यम से नहीं मिलता है। यौन संबंधों की समस्याओं व यौन रोगों की बढ़ती भीषणता वाले इस काल में भी यौन षिक्षा के रास्ते अभी तक खुले नहीं हैं। विवाहित सहेलियाँ व मित्र आदि इस दिषा में कुछ सहायक हो सकते हैं। टीवी पर दिखाई जाने वाली बातें मार्गदर्षन करने की बजाय उत्तेजना पैदा करने वाली हैं। ऐसे में सेक्स क्या है? इसमें सही व गलत क्या है? सुरक्षित सेक्स क्या है? आदि बातों का ज्ञान हमें सेक्स संबंधी पुस्तकों के माध्यम से ही होता है, इंटरनेट से भी इस संबंध में जानकारी प्राप्त हो सकती है।
        विवाह के पश्चात् यौन संबंध यानी सेक्स कब होना चाहिए, यह एक अत्यंत गोपनीय प्रष्न है, एक-दूसरे को समझे व मन से तैयार हुए बिना, एक-दूसरे से प्यार हुए बिना इसे करना या स्वयं को दूसरे पर थोपना अनैतिक, अमान्य व बलात है। स्वयं को समर्पित करते समय स्त्री हमेषा प्यार, सुरक्षा व विष्वास चाहती है। चरम सुख तक पहुँचने में उसे समय लगता है, इसके विपरीत पुरुषों में इसके प्रति एक सीधापन व जल्दबाजी होती है क्योंकि उत्तेजित होने में उन्हें कम समय लगता है। बिना किसी भावात्मक तैयारी व अपनेपन के यह कर पाना पुरुषों के लिए स्वाभाविक क्रिया है। मगर भावात्मक दृष्टि से बिना जुडे़ इसे कर पाना स्त्री के लिए अस्वाभाविक एवं कठिन है। दोनों पक्षों में इस प्रकार की भिन्नता होते हुए भी यौन संबंध तब ही मधुर बन सकते हैं, जब दोनों एक-दूसरे की कद्र करें, समझें व सुविधा -असुविधा का पूर्ण ध्यान रखें।
        विवाह के पश्चात् एक बार यौन संबंध स्थापित होने के बाद यह क्रिया सक्रिय रूप से दोनों की इच्छा व आवष्यकतानुसार चलती रहती है। इस सक्रिय यौन काल में महिलाओं में जनन अंग में संक्रमण एक आम समस्या है। कुठ महिलाओं में प्रजनन अंग की रचना ही इस प्रकार से होती है कि उनमें संक्रमण जल्दी होता है। मूत्राषय, मूत्रनली व योनिमार्ग के संक्रमण से बहुत-सी महिलाएँ लंबे समय तक परेषान रहती है व चिकित्सा कराती रहती है। संक्रमण से बचाव के लिए आवष्यक है कि पति-पत्नी स्वस्थ हों, दोनों के वस्त्र, अंग, हाथ आदि स्वच्छ हो और सेक्स को स्वच्छ व सुरक्षित प्रकार से करते हुए उसका आनन्द उठाया जाए। सहवास के बाद अंगों को स्वच्छ पानी से साफ करना व स्वच्छ अंगवस्त्र पहनना संक्रमण से बचने हेतु जरूरी है।
               
                                    प्रथम बार माँ बनने की तैयारी
        आज परिवार नियोजन के इतने साधन मौजूद हैं कि ज्यादातर युगल पूरी योजना व तैयारी के बाद ही बच्चा पैदा करते हैं। आज के फ्यूचर पेरेंट्स तो भावी संतान के जन्म की तारीख, महीना और यहाँ तक कि उनकी क्षा तक को ध्यान में रख कर डिलीवरी ध्यान करते हैं।
        दरअसल छोअे परिवार, नौकरी पेषा महिलाएँ और उस पर सीमित संसाधनों ने परिवार के आकार पर और हमारी सोच पर बहुत असर डाला है। हर तरह से सोच-विचार कर के षिषु के आगमन की तैयारी की बात अब अजीब नहीं लगती। इसलिए अगर आप भी पहली बार माँ बनने की सोच रही हैं, तो कुछ खासबिन्दुओं पर अच्छी तरह सोच-विचार करने के बाद ही फैसला करें। ऐसा करने पर गर्भावस्था आपके लिए सुखद अनुभूति से भरी होगी और संतान का जन्म आपके जीवन का सबसे सुखद क्षण बनेगा।


    Bachaa plan karne se pehle Ki Tayari-
    Maa banne ka nirnay sirf ek eshtri ka ya sirf uske pati ka hi ho athva uske smast parivarjano ki sehmati ho, aaj yeh ek gambhir prashn hai. yadi garbhdharn se lekar sishu janm tak ki smast isthitiyon ko sahi paya jaye, to koi bhi eshtri maa banne ka nirnay le sakti hai.
              Maa banna ek sukhad anubhuti hai, lekin utni hi badi jimmedari bhi. atah aavasyak hai ki vivah ke baad pati-patni apash mein vichar-vimarsh karke hi bachaa plan karen. maa ka sareer ek aishi kyari hai, jahan bache ka beaz ropit kiya jata hai aur bharpur khaad – pani dekar is beaz ko vikshit kiya ja sakta hai. aajkal mahilayen bhi naukri- pesha hai. atah jab bachaa plan karen, to yeh dekh le ki aap ushko samay de payengi? ishke alava prashn aata hai, ki pati-patni ke vivah ke baad apas mein hi setting nahi ho payi, upar se mahila garbhvati ho gayi. aishe mein kai mahilayen garbhpat karane doctor ke chakkar lagane lagti hai. sawal yeh uthta hai ki sarririk roop se ek mahila apne aapko garbhdharan ke liye kaishe taiyaar karen. kin-kin baton ka dhyan rakhe taki use jo bachaa ho, to vah poorn ho, gyanvaan ho, vah swasth aur sunder ho.
                                          Swyam ko parkhen
    Swyam ko parkhne ka earth swyam ke sareer aur uski kirya ko janne se hai, vaishe to sareer ka samany gyan sabhi ko hona chahiye per prajnan ka gyan har eshtri-purush ke liye avashyak hai, khashkr unhe jo vaivahik sutra mein bandhne ja rahe ho, ya bandh chuke ho, hamare desh mein career mein vishvash rakhne wale shikchit, smart, adhunik yuva bhi prajnan ke vishay mein bahut  seemit jankari rakhte hai. sex aur prajnan se judi swasth smasya uttpan hone ke baad hi log jankari prapt karna chahte hai. kuch din pehle daftar mein karyrat mahilaon hetu ayojit ek swasth karykram mein ek sehez sawal pucha gaya ki mashikdharm kyoun aur kis prakar aata hai? magar koi bhi ishka uttar nahi de payi.
             Mashikdharm, mc aur period rojkaal mein har maah hone wali ek harmon niyantrit kirya hai. har maah 4-5 dino ka raktstrav rukne ke sath-sath garbhasy ki andruni parat kramsah moti aur parivartit hoti rehti hai. 4 saptah ke antt mein yeh apne aap bikhar jati hai jisse raktstrav hota hai, jo yoni marg se bahar aata hai, jishe hum mc aur mashikdharm kehte hai. kanya mein mashikdharm niymit hona yeh darshata hai ki ushke prajnan angon ki rachna aur kirya samany hai. mashikdharm mein hone wale harmon ke parivartan pratimah aund ka falikaran, vikas aur vimochan bhi karte hai. is sampoorn  kirya ka lakchy garbhadhan hota hai, jab garbh teher jata hai, to gharbhasy mein vikshit moti parat garbh ki surakha aur poshahaar pradan karne ke kaam aati hai, ishke baad  mashikdharm ruk jata hai.           
                    Garbhdharan karna eshtri ke sareer mein poorn vikshit aur vimochit aund ke sukranu se milaap ke karan hota hai. purush ke sath sehwas arthat sumbhog ke karan sukradun veery ke madhyam se eshtri ke sareer mein pahunchte hain, jis mahila mein mahavari niymit hai uske sareer mein aundvimochan kirya madhy mashik yaani 14 din ke asspass hoti hai, aundvimochan ke 13 se 18 din ke dauraan sehvass karne se garbh teharne ki sambhavna rehti hai, aundvimochan ki jankari garbh ko rokne aur garbhdharan hetu koshis karne dono mein upyogi hai.

                                          Hamari Sexual Life

    Yeh atyant nizi hone ke sath-sath ek moolbhoot vishay hai. parantu hamari vidambna yeh hai ki itna mehetvpoorn hote hue bhi ishka gyan hame parivar aur sickha pathykram ke madhyam se nahi milta hai. yaun sambandho ki samasyaon aur yaun rogo ki badti bhisadta waale iss kaal mein bhi yaun sickha ke rashte abhi tak khule nahi hai. vivahit saheliyan aur mitra aadi iss disha mein kuch sahayak ho sakte hai. t.v per dikhai jane wali baaten margdarshan karne ki bazay uttejana paida karne wali hai. aise mein sex kya hai? ishme sahi aur galat kya hai? surakhit sex kya hai? aadi baaton ka gyan hame sex sambandhi pustakon ke madhyam se hi hota hai, internet se bhi is sambandh mein jankari prapt ho sakti hai.
              Vivah ke paschat yaun  sambandh yaani sex kab hona chahiye, yeh ek atyant goapniy prashn hai, ek-dushre ko samjhe aur mann se taiyaar hue bina, ek-dushre se pyar hue bina ishe karna aur swayam ko dushre per thopna anaitik, amany aur balat hai. swayam ko samarpit karte samay eshtri hamesha pyar, suraksha aur vishvas chahti hai. charam sukh tak pahunchne mein use samay lagta hai, ishke viprit purushon mein ishke prati ek sidhapan aur jaldbaji hoti hai kyounki uttejit hone mein unhe kam samay lagta hai. bina kishi bhavatmak taiyari aur apnepan ke yeh kar pana purushon ke liye swabhavik kirya hai. magar bhavatmak dristi se bina jude ishe kar pana eshtri ke liye aswabhavik aur kathin hai. dono pakshon mein es prakar ki bhinnta hote hue bhi yaun sambandh tab hi madhur ban sakte hai, jab dono ek-dushre ki kadr karen, samjhe aur suvidha-asuvidha ka poorn dhyan rakhe.
            Vivah ke paschat ek baar yaun sambandh esthapit hone ke baad yeh kirya sakriy roop se dono ki ichaa aur avasyaktanushar chalti rehti hai. is sakriy yaun kaal mein mahilaon mein janan ang mein sankrmad ek aam samasya hai. kuch mahilaon mein prajnan ang ki rachna hi is prakar se hoti hai ki unme sankramad jaldi hota hai. mutrashy, mutrnali aur yonimarg ke sankramad se bahut-si mahilayen lambe samay tak pareshan rehti hai aur chikitsah karati rehti hai. sankramad se bachav ke liye avashyak hai ki pati-patni swasth ho, dono ke vastra, ung, hanth aadi swach ho aur sex ko swach aur surakchit prakar se karte hueushka anand uthaya jaye. sehwash ke baad angon ko swach pani se safh karna aur swach ung vastra pehnna sankramad se bachne hetu jaruri hai.
                      
    Phali baar maa banne ki taiyari
            Aaj parivaar niyojan ke itne sadhan mauzood hai ki jyadatar yugal puri yojna aur taiyari ke baad hi bachaa paida karte hai. aaj ke future parents to bhavi santan ke janam ki tareeq, mahina aur yahan tak ki unki sickha tak ko dhyan me rakh delivery dhyan karte hai.
              Darsal chote parivar, naukri pesha mahilayen aur us per simit sansadhno ne parivar ke aakar per aur hamari soch per bahut asar dala hai. her taraf se soch - vichar kar ke sishu ke aagman ki taiyari ki baat ab ajeeb nahi lagti. isliye agar aap bhi pehli baar maa banne ki soch rahi hai, to kuch khas binduon per achi tarah soch - vichar karne ke baad hi faisla karen. aisha karne per garbhdhawastha apke liye sukhad anubhuti se bhari hogi aur santaan ka janam apke jeevan ka sabse sukhad chad banega.        
                            Kab karen bachaa plan
            Sarvpratham to yeh tai karen ki varsh ke kish maah mein vishes mausam mein aap maa banna chahti hai. tareeq aur mahine ka chayan is baat per nirbhar kar sakta hai ki us samay aapko aur pati ko naukari se chutti milne mein suvidha ho. jaise account ke chetra se jude logo ko march-april ke mahino mein fursat nahi hoti hai. isliye in mahino mein unhe prasav ka daaitv nibhane mein pareshani honi tai hai.                                                                                     
            Apne seher ke mausam ko bhi jaroor dhyan mein rakhe. jyada garmi aur kadake ki sardi ki bajay suhavne mausam mein prasav anukool mana jata hai. aksar kuch pati-patni barsat ke mausam mein prasav se bachna chahte hai kyounki chote baby ke kapde aadi sukhane mein pareshani hoti hai. vahin aishe jodo ki bhi kami nahi, jo kehte hai ki barish mein delivery ke liye hospital jane ka alag hi romanch hai, apna hi maza hai.                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                               agar aap parivar ki estithiyoun ko dhyan mein rakh kar garbhdharan ki yojana banayengi  to aapko swayam ko to suvidha hogi hi sath hi parivar ke anya sadasy bhi aapko sehyog dene ki esthti mein honge. yadi apka parivar bada hai, to is baat ka avasy dhyan rakhe ki aapki hi delivery date ke ass-pass parivar mein koi vishes ayojan na ho. isshe swayam aap aur apka parivar apke sishu janam per poora-poora dhyan de sakega. dhyan rakhe, dusaron ki suvidha ka thoda khyal karne per swayam apki aur apke bache ki aachi  dekhbhal ho sakegi.
              Ishi tarah yadi aap ya pati athva parivar ka anya sadasy koi course aadi kar raha hai, to garbhdharan karne ka nirnay lete samay us sadasy ki paricha ke samay ka bhi avasya dhyan rakhe. aisha karke aap vyarth ke tanav aur bhagdaud se bachi rahengi.               
            Garbhdharan aur sishu janam ko laparvahi se na le. vastav mein yeh bahut badi jimmedari hoti hai. isliye agar samay rehte sareerik aur manshik taiyari ke sath-sath arthik pehlu per bhi dhyan kar le, to yeh samay jeevan bhar sukhad anubhuti ke taur per yaad rahega.      
             Yadi aap naukri ke prati satark hai, to pehle usse judi mehtvpoorn jimedariyoun per dhyan de. aisha na ho ki chuttiyoun per rehne ke karad apki padonatti ka avsar hath se jata rahe. 
             Parivar mein saas, nand, devrani, jetahni aadi ho to unhe apni delivery ki tareeq ke bare mein jaroor batayen taaki ve apni tarah se avasyak taiyari kar le. vaise prasav ke samay dekhbhal ke liye jishe bulana chahen usse bhi pehle se is vishay me baat kar le. agar aishi koi vyawastha nahi hai to bhi daren nahi, gharelu kamkaj ke liye aaya rakh le. prasav ke baad apni aur bache ki dekhbhal aur malish aadi ke liye bhi pehle se hi aaya ka intzam kar le, is tarah in choti-choti baton per dhyan dekar aap apne garbhdharan ke anubhav ko anutha banayen.
                           
                            Abhi bachaa kyo nahi?
    Aneak baar vivah ke baad mahavari nahi hoti kyounki suru mein hi garbh tehhar jata hai. darasal pati-patni is mudde ko gambhirta se nahi lete. yahan per yeh batana jaruri hai ki vivah ke samay lagbhag  80 pratisat yuvtiyan prajnan ki drishti se samany, sacham aur taiyar hoti hai. atah vivah ke turant baad garbhdharan ki sambhavna adhikttar yuvtiyoun mein hoti hai, isliye vivah ki taiyari ke sath-sath apko is baat per bhi dhyan dena padega ki apko bachaa kab chahiye. garbh se hi bache ki sahi dekhbhal avasyak hai. yeh tabhi sambhav hai jab pehla bachaa vivah ke dedh-do varsh baad hi janme. vivah ke baad ke kareeb 2 saal pati-patni ko swachandta se bitane chahiye. yeh samay unh ek-dushre ko samajhne, swayam ko ek-dushre ke anusar daalne, padai poori karne, carrier banane ityadi mein lagana chahiye. sishu ke janam ke sath hi ajadi samapt ho jati hai. vikshit deshon mein mahilayen swachandjeevan aur niyojit (pland) garbhdharan ko bahut mehtv deti hai. yeh jeevan saili ki gudwatta ko bhi badata hai.
    Yaun jeevan ke armbhik samay mein mahilaon ko peeda aur asuvidha ki estithi se bhi do-char hona pad sakta hai. pehli baar aur suru-suru mein sambhog kirya ke karad yoni marg ka khinch jana, sujan, halki choten lagna, sankrmad ityadi samasyayen bahut si eshtriyon mein hoti hai. inko theek hone me samay lagta hai, kisi ke mutra mein sankrmad ho jata hai, jise hanimoon sistaitis kehte hai. barabar mutra tyag ki pravati, jalan aur dard ishke lakchad hote hai. yah ek bahut pidadayak estithi hai ishme jivadunrodhi aur anya davayen leni padti hai. aishi estithi mein agar garbhdharan hua, to mutrsankrmad ki ausdhiyan dena bhi chikitsak ke liye ek samasya hoti hai. is baat ko sabhi jante hai ki sabhi prakar ki jevadunrodhi aur dard nivark davayen bhrund ke vikash per viprit prabhav daal sakti hai.
    Garbh sambandhi asamany pariesthtiyan jaise baar-baar rakt aana aur pet mein dard rehna aadi mein aasankit garbhpat ki esthti hoti hai. yeh samasya lagbhag 20 pratisat mahilaon mein hoti hai. isme chikitsah ki dristi se din bhar bistar per lete rehna aur lambe samay tak yaun sambandho se bachna avashyak hota hai. vivah ke turant baad hi pati bhi is esthti mein rehna nahi chahta. agar mahila ka naya job hai, tab us per bhi kathinai aa sakti hai. sabse mehtvpoorn baat yeh hai ki prasuti vigyan ke anusar vivah ke turant baad thehrne wale garbh ki jatilta pratisat bahut adhik hoti hai aur sishu ka vikash bhi samany se kam hota hai. naye ghar aur parivar mein swayam ko dhalte samay aneak navvivahiton ko ek tanavpurn esthti mein rehna padta hai, maanshik tanav ke karad paustik ahar na lene se bhi jatilta dar aur sishu ki kamjori badti hai, aise mein vichar karen ki kya samajhdari hai is per jald hi bachaa utpann karne mein?
    sadhardtyah garbhdharan ki jaldbaaji ke peche sabse bada karad parivarik aur samajik hota hai. bachaa kab ho, yeh hak hone wale bache ki maa ka hota hai. naari swatantrta ke is yug mein uske niyojit prajnan per dhyan dena bahut jaruri hai.

    • Blogger Comments
    • Facebook Comments
    Item Reviewed: Pregnancy tips- maa banne se pahle ki tayari- जाने माँ बंनाने की पहले की तयारी Rating: 5 Reviewed By: Gharelu Upay
    loading...
    Scroll to Top