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    रविवार, 15 मई 2016

    Gupt Rog- Shigrapatan, Dhatu Rog, Swapandosh गुप्त रोग दूर करने के 33 घरेलु आयुर्वेदिक नुस्खे

     Shigrapatan 

    (1) श्वेत कन्द टोला, रिहा के बीज टोला, अकरकरा माशे पीसकर, रात को शीतल पनि में साथ फांक ले. शीघ्रपतन ठीक हो जायेगा.
    (2) ईसबगोल की भूसी, काहू कासनी के बीज, धनिया, नीलोफर के फूल, भांग के बीज, वंशलोचन, अनार के फूल, गुलाब के फूल का चरण रात को ठन्डे पानी के फांक ले. शीघ्रपतन होना बंद हो जायेगा
    समुद्र शोष, गेंदे जे बीज, ढाक के बीज, काळा टिल, सेमल का मसला, सिरसा के बीज का चूर्ण - मशे सुबह-शाम सेवन करे. शीघ्रपतन लाभकारी है.
    Shigrapatan, Dhatu Rog, Swapandosh
    Shigrapatan, Dhatu Rog, Swapandosh
    (3) घरेलु नुस्खा सभी अपनाए -उड़द का अट्टा घी में भून ले और मिश्री के साथ मिलकर हवला बनकर  सुबह खाये, वीर्य गाढ़ा बनेगा और शीघ्रपतन दूर होगा. पर उतना ही खाये जितना पचा सके.
    (4) घरेलु नुस्खा- काले छुहारे के खीर बनाकर खाये  शीघ्रपतन होना ठीक हो जायेगा.
    (5) कुलंजन, सेमर की जड़, कोंच के बीज, अकरकरा, पीपल का गोंद, जावित्री, गिलोय का सत, वंशलोचन का चरण गाय के दूध के साथ सुबह शाम ले से शीघ्रपतन होना बंद हो जाता है.
    (6) तुलसी के बीजों या जड़ का चूर्ण २ ग्राम लेकर पान में रखकर खाये.
    (7) असली वंशलोचन व गिलोय का अर्क बराबर भाग लेकर पीस ले और सूती कपडे में छानकर २ ग्राम चूर्ण शहद के साथ सेवन करे शीघ्रपतन में आराम आएगा.
    (8) ७-८ छुहारे को  २५० ग्राम दूध में उबले आउट ठंडा कर सोने से पहले पिए. और छुहारे भी खा ले. इससे वीर्य गाढ़ा होता है.
    (9) रात में हल्का ग्राम दूध पीना भी शीघ्रपतन कम करता है. 
    (10) ताजे आवले का रस शहद के साथ चाटने से शीघ्रपतन होना बंद हो जाता है.
    (11) प्याज के २०-२५ ग्राम सत्व में नमक डालकर दोपहर के भोजन के बाद ले शीघ्रपतन में आराम मिलेगा. par कभी खाने के १ घंटे अंदर  सम्भोग न करे.
    (12) इमली के बीजों की गिरी को कूटकर सूती कपडे में छान कर दोगुना मात्र में पुराण गुड मिलकर गोलिया bana ले. सम्भोग करने के २ घंटे पहले २ गोली का सेवन करे. वीर्य योनि जल्दी नहीं गिरगा.

    Swapandosh स्वप्नदोष

    (14) त्रिफला चूर्ण १० ग्राम, गेरू और पिसी हल्दी - ग्राम, भुनी फिटकरी १०० ग्राम सबको पीसकर शीशी में भरकर रख ले. इसमें से आधा चम्मच थोड़ी सी चीनी में मिलकर सुबह, शाम, दोपहर सेवन करने से स्वप्नदोष नहीं होता है. वीर्य के कमजोरी दूर होती है
    (15) त्रिफला चूर्ण १०० ग्राम, कपूर ग्राम, पुराना गुड़ ग्राम, सबको चूर्ण बन ले और ढाक के फूल के रस में बेर के बराबर छोटी-छोटी गोलिया बना ले. एक गोली सुबह और एक गोली रात को दूध से ले. स्वप्नदोष निवारण के लिए यह लाभकारी दवा  है.
    (16) ईसबगोल की भूसी १०० ग्राम, बंग भस्म १० ग्राम को मिलकर एक शीशी में रख ले. रात को सोते समय समय एक चमम्च सोते समय मिश्री मिले कुनकुने दूध के साथ सेवन करे.
    (17) २५ ग्राम गिलोय को एक गिलास पानी में उबालकर काढ़ा बना ले. जब पानी / बचे तब उठाकर ठंडा कर ले और इसमें चमम्च शहद मिलाकर पिए. स्वप्नदोष रोग ठीक हो जाएगा.
    (18) नीम का रस, गोखरू, गिलोय और सूखे आवले- सबको कूट-पीसकर चूर्ण बना ले. इसमें से एक चुटकी करें घी के साथ रोज सेवन करे.
    (19) नीम की कोलपले, बाबुल के थोड़े से पत्ते और गिलोय ग्राम- तीनो को कहकर ऊपर से पानी पी ले. स्वप्नदोष नहीं होगा.
    (20) ताजी नीम की पत्तियां रोज  चबाकर खाने से स्वप्नदोष जड़ से ख़त्म हो जायेगा.
    ६० ग्राम कंधारी अनार का छिलका, ६० ग्राम मुलहठी का चूर्ण एक चमम्च फंकी लगाकर उतना ही शहद  सेवन करे. इसके साथ दूध का सेवन  करे.
    (21) लहसुन की - कालिया ग्राम शहद के साथ सेवन करके एक गिलास भैंस का ग्राम दूध पिए.
    बरगद का दूध बतशो के साथ सेवन करे. - बताशे ही ले, अधिक ले स्वप्नदोष  हमेशा के लिए ख़त्म हो जायेगा.
    (22) बरगद का दूध बतशो के साथ सेवन करे. 3- बताशे ही ले, अधिक नहीं. दूध के साथ ग्राम असगंधा का चूर्ण ले स्वप्नदोष  ख़त्म हो जायेगा.
    (23) बिना बीजवली बाबुल की फली, बाबुल की कोपले और बाबुल की गोंद सेर तक पीसे ताकि चारो चीज़े अच्छी  तरह से मिल जाये. यह मिश्रण कांच के बर्तन में भरकर रख ले. इस चूर्ण को - चमम्च सुबह शाम दूध के साथ सेवन करे. Is चूर्ण को - चमम्च सुबह शाम दूध के साथ सेवन करे. इस मिश्रण को - चमम्च सुबह शाम दूध के साथ सेवन करे.
    (24) एक चमम्च त्रिफला चूर्ण   शहद में मिलाकर सोते समय चाटने से स्वप्नदोष और धातु का बहना की बीमारी दूर हो जाती है. इस चूर्ण को ग्राम पानी के साथ भी सेवन किया जा सकता है.

     Dhatu Rog धातु रोग-

    (25) गाय के ताजा दूध के साथ . माशा मुलहठी का चूर्ण ले धातु रोग ठीक हो जाते है.
    (26) पके केले को मिश्री से लगाकर  खाने से सभी प्रकार  के धातु रोग ठीक हो जाते है.
    (27) गिलोय, गुलाब के फूल, अवला, धनिया, चन्दन का चुरा की ठंडे बनकर पीने से सभी तरह के धातु रोग ठीक हो जाते है.
    (28) इमली, बाबुल, धक, कोंच के बीज - माशा लेकर २८ घंटे तक पानी में भेजने दे. उसके बाद चिल्का उठाकर सील पर पीस ले और मिश्री मिलाकर चाटे.
    (29) सतवारी, तलमखने, कोंच के बीज, गिलोय  का सत्व, सफ़ेद  मूसली, गोखरू, चोपचीनी बराबर लेकर चरण बन ले और माशा ठंडा पानी के साथ सुबह शाम ले . सभी तरह के धातु रोग ठीक हो जाते है.
    (30) बबुल का बकककल, गोंड, फूल, फली, पट्टी को सुखकर बराबर मात्र में पीस ले. इसमें से मशे लेकर धुंध के साथ सेवन करे. इलायची, वनसलोहन, गिलोय का सत्व, मुलहठी, हल्दी का चूर्ण, मशे मलाई के साथ सुबह शाम सेवन करने से धातु रोग ठीक हो जाता है


    (31) हरड़ माशा, भेद माशा, आवला माशा को कूट पीसकर पनि में बेगो दे. दूसरे दिन मथकर-छानकर मिश्री मिलाकर सुबह पिए सभी प्रकार धातु रोग में फायदा करेगा.
    (32) सौंफ, बनफशा गुलाब के फूल , सफ़ीद चन्दन की ठंडाई बनाकर पीने से धुत रोग नहीं होते है.
    (33) प्याज का एक चम्म्च ताजा रस निकलकर चम्म्च शायद में मिलकर सुबह शाम २१ दिन तक सेवन करने से लिंग की कमजोरी नपुंसकता दूर हो जाती है.


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