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    सोमवार, 7 नवंबर 2016

    Tuberculosis-T.B causes symptoms Treatment टी.बी दूर करने के २६ घरेलु उपचार

               Tuberculosis- T.B Causes Symptoms Treatment

    यक्ष्मा या क्षय रोग क्या है?
    यक्ष्मा शब्द का अर्थ है- क्षय हो जाना या गल जाना। वास्तव में इस रोग में, जहाँ का भी क्षय रोग हो वह हिस्सा क्षय हो जाता है, खोखला हो जाता है, खराब हो जाता है। 

    Symptoms of Tuberculosis(T.B.) - T.b ke Lakshan

        रोग-लक्षण- रोगी को खाँसी रहना, दिन-रात बुखार बने रहना और शाम को बुखार बढ़ना, भूख की कमी, छाती में दर्द, साँस लेने में कष्ट, दुर्बलता और शरीर की क्षीणता बढ़ते जाना, पीला सादा बहुतायत में कफ, कभी-कभी कफ में रक्त आना, खाँसी से स्वर-नली में घाव होकर आवाज बैठ जाना, रात को पसीना आना यक्ष्मा के लक्षण है।
        यह बीमारी बड़ों से अधिक बच्चों में पायी जाती है। बच्चों के नाजुक फेफड़े व कोमल श्वास नलिया, टी0बी0 जीवाणुओं के लिए आश्रय स्थल हैं। बच्चों में टी0बी0 के लक्षण वयस्को से भिन्न नहीं हैं। कई बार तो भूख न लगना, वनज गिरना, शीघ्र थकावट, हल्का बुखार, गिरी-पड़ी तबीयत ही केवल मात्र लक्षण होते हैं। बार-बार जुखाम, खाँसी व साँस की बीमारी होने वाले बच्चों में टी0बी0 का निदान आवष्यक है। गले में गाँठें (कंठमाला) बच्चों में टी0बी0 का विषेष लक्षण है।
    T.b Treatment
    T.b Treatment Hindi

       शरीर के प्रभावित अंग-
    सबसे अधिक टी0बी0 का असर फेफड़ों पर होता है। अन्य प्रभावित होने वाले अंगों में हड्डियाँ, आँतें, टांसिल्स, चमड़ी, गुर्दे व प्रजनन-अंग सम्मिलित हैं।
    1- चाहे शरीर का कोई भी हिस्सा प्रभावित हो, सामान्य लक्षण एक से होते हैं। हरारत, हल्का सायंकालीन बुखार, भूख कम, वजन गिरना, टी0बी0 के सामान्य लक्षण हैं।
    2- फेफड़ों की टी0बी0 में खाँसी, बलगम आना, छाती दर्द, साँस में दिक्कत, खाँसी के साथ खून आना प्रमुख लक्षण हैं।
    3- आँतों की टी0बी0 में पेट में गैस का गोला बनना, बदहजमी, पेट फूलना, खास लक्षण हैं।
    4- सन्तानहीनता का प्रमुख कारण बदहजमी, पेट फूलना, स्त्रियों में बच्चेदानी की टी0बी0 खास लक्षण हैं।
    5- गुर्दों की टी0बी0 में पेषाब में खून आना और गुर्दों में सूजन आना खास संकेत हैं।
    6- बी0 सी0 जी0 का टीका एक बार लगवाने से जीवन भर टी0बी0 से बचाव होता है। यह टीका एक दिन की उम्र के शिशु  से लेकर जीवन भर कभी भी लगाया जा सकता है।
    यह रोग यक्ष्मा, राजयक्ष्मा, तपेदिक, क्षय, टयूबरकुलोसिस आदि अनेक नामों से व्यक्त किया जाता है। वर्षों रोग भोगते-भोगते शरीर हड्डियों का कंकाल मात्र रह कर अन्त में रोग ठीक न हो तो रोगी मर जाता है। एक्स-रे कराने से इस रोग का पता लग जाता है।

    Causes of Tuberculosis(T.B.)- Tb Hone Ke Karan

      टी0बी0 के टुबरकिल बैसीलस नामक जीवाणु रोगी के कफ या थूक में होते हैं जिनसे यह रोग हवा,
    पानी, दूध द्वारा फैलता है। दूषित हवा, गीले स्थान, साँस के साथ धूल कण जाना, अधिक स्त्री-प्रसंग, अपुष्टकर भोजन, शक्ति से ज्यादा मेहनत, अधिक सन्तान को जन्म देना, शराब पीना, टी0बी0 के रोगी के साथ आहार-विहार आदि कारणों से यह रोग फैलता है।

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    क्षय रोग के उपचार में सबसे मुख्य बात यह है कि दवा एक दिन भी नहीं छोड़नी चाहिए, अधिकतर रोगी डेढ़ दो-माह बाद जब क्षय रोग के लक्षण समाप्त होने लगते है, तब दवा लेना बन्द कर देते हैं। इसीलिए धीरे-धीरे आगे चलकर ऐसे रोगियों में कई जटिलताएँ पैदा हो जाती हैं व कई बार ये जानलेवा साबित हो सकती है। चिकित्सक के बताए अनुसार नियमित रूप से निर्धारित समय तक इलाज सुचारू रूप से किया जाए तो रोग से पूरी तरह छुटकारा मिल जाता है व बीमारी जड़ से खत्म हो जाती है।
    टी0बी0 के रोगी के भोजन पर विषेष ध्यान देना चाहिए, बल्कि भोजन को ही चिकित्सा समझना चाहिए। सूर्य का प्रकाष, स्वच्छ हवा, पौष्टिक भोजन एवं पूर्ण विश्राम मिलना रोगी के लिए आवष्यक है। स्त्री-प्रसंग और धूम्रपान से सख्त परहेज रखना चाहिए। संयमी जीवन स्वास्थ्य के लिए अवाष्यक है। टी0बी0 के रोगियों को यहाँ वर्णित चीजें देने से बहुत लाभ होता है-
    1.Tuberculosis(T.B.) Medicine- शक्कर को जलाने से क्षय, हैजा एवं चेचक आदि रोगों के कीटाणु समाप्त हो जाते हैं।
    2.Tuberculosis(T.B.) treatment home remedies in hindi- एक गिलास दूध में पाँच पीपल डाल कर उबालें और फिर ठंडा होने पर शक्कर डालकर नित्य सुबह-षाम पीयें। इससे खाँसी, जुकाम, दमा, फेफड़े की कमजोरी, आरम्भिक टी0बी0 में लाभ होता है।
    3.Tuberculosis(T.B.)treatment in patanjali -  यक्ष्मा रोग में मक्खन, मिश्री में घी मिलाकर खाने से क्षय रोग का नाष होकर बल मिलता है।
    4.Tuberculosis(T.B.) Treatment at Home -  यक्ष्मा में जिन्हें लगातार ज्वर रहता हो, उन्हें ग्यारह पत्ती तुलसी, नमक, जीरा, हींग एक गिलास गरम पानी में नीबू का रस 25 ग्राम मिलाकर तीन बार कुछ दिन पीना चाहिए।
    5.Tuberculosis(T.B.) Medicine-सेब खाना यक्ष्मा में लाभदायक है। आँतों, यकृत और मस्तिष्क के लिए लाभदायक है।
    6.Tuberculosis(T.B.) treatment ayurvedic in hindi-एक कप आमरस में 60 ग्राम शहद मिलाकर सुबह-षाम नित्य पीयें। नित्य तीन बार गाय का दूध पीयें। इस प्रकार 21 दिन करने से यक्ष्मा में लाभ होता है।
    7.Tuberculosis(T.B.)  ka Gharelu Upchar-यक्ष्मा में भोजन के रूप में अंगूर का सेवन करना चाहिए।
    8. Tuberculosis(T.B.) treatment home remedies in hindi - मुनक्का, पीपल, देषी शक्कर- ये तीनों समान भाग पीस कर एक चम्मच सुबह-षाम खाने से यक्ष्मा ( टी0बी0 ), श्वास, खाँसी दूर हो जाती है।
    9.Tuberculosis(T.B.)treatment in patanjali- नित्य 25 ग्राम कच्चा नारियल खाने से पीस कर पीने से यक्ष्मा के कीटाणुओं का नाष होता है। तथा फेफड़ों को बल मिलता है।
    10.Tuberculosis(T.B.) Medicine-आठ खजूर दो बार खाना क्षय-रोगियों के लिए लाभदायक है।
    11.लौंग क्षय रोग का नाष करने वाली है। यह भोजन के बाद लें।
    12.Tuberculosis(T.B.) treatment home remedies in hindi-टी0बी0 में गाजर का रस पीना लाभदायक है, इसमें भोजन के संतुलित तत्त्व होते है।

    13.Tuberculosis(T.B.)treatment in patanjali- केले के पेड़ का ताजा रस या सब्जी बनाने वाला कच्चा केला क्षय रोग को दूर करने में रामबाण है।
    केले के पत्ते का रस मधु में मिलाकर क्षय रोगी को पिलाते रहने से भी उसके फेफड़ों के घाव भर जाते हैं। बलगम कम हो जाता है और फेफड़ों से खून आना रुक जाता है। केले के तने न हों तो केली के पत्तों का रस इसी प्रकार काम में ले सकते हैं।
    14.Tuberculosis(T.B.) Treatment at Home -  शरीर पर यक्ष्मा के कीटाणुओं के आक्रमण को प्याज का रस नष्ट कर देता है। कच्चे प्याज को खाने से भी समान प्रभाव होता है। यह स्वास्थ्यरक्षक, कीटाणुनाषक है। कच्चे प्याज पर नमक डालकर खाने से यक्ष्मा में लाभ होता है।
    15.Tuberculosis(T.B.) Medicine-  यक्ष्मा रोग में बलगम आना बन्द करने के लिए चैथाई कप प्याज का रस इतना ही पानी मिलाकर पीयें। छोटे-छोटे टुकड़े करके एक गिलास पानी में डाल कर उबालें। आधा पानी रहने पर छान कर पिलायें। बलगम आना बन्द हो जायेगा।

    Home Remedies- Tuberculosis(T.B.) Treatment in Hindi

    16. Tuberculosis(T.B.) treatment ayurvedic in hindi-लहसुन खाने वालों को क्षय रोग नहीं होता। इसके प्रयोग से क्षय के कीटाणु नष्ट हो जाते हैं। क्षय रोग के लिए लहसुन एक वरदान है। हर प्रकार के क्षय को दूर करने के लिए लहसुन अमृत से कम नहीं है। लहसुन में सल्फ्यूरिक एसिड अच्छी मात्रा में होता है, जो क्षय के कीटाणुओं को नष्ट करता है।
      17. Tuberculosis(T.B.)  ka Gharelu Upchar-  फेफडे़ के क्षय में लहसुन के प्रयोग से कफ गिरना कम होता है रात को निकलने वाले पसीने को रोकता है, भूख बढ़ाता है और नींद सुखपूर्वक लाता है। फेफडे़े में  क्षय होने पर लहसुन के रस से रुई तर करके सूँघना चाहिए ताकि श्वास के साथ मिलकर इसकी गन्ध फेफड़ों तक पहुँच जाय। इसे बहुत देर तक सूँघते रहना चाहिए। इसकी तीव्र गन्ध ही है, जो प्रबल-से-प्रबल कीटाणुओं, कृमियों तथा असाध्य रोगों को मिटाती है। खाना खाने के बाद लहसुन का सेवन भी करना चाहिए।
     18. Tuberculosis(T.B.) treatment ayurvedic in hindi  - आन्त्र क्षय में लहसुन का रस आठ बूँद 12 ग्राम पानी में पिलायें।
    19.Tuberculosis(T.B.)treatment in patanjali-  फूलगोभी की सब्जी खाने से या कच्ची ही खाने से रक्त की उलटी होना बन्द हो जाता है। क्षय रोगी इसे लें।
    20.Tuberculosis(T.B.) Medicine- जिसे यक्ष्मा का पूर्व रूप हो उसे मक्का की रोटी खानी चाहिए।
    21.Tuberculosis(T.B.)  ka Gharelu Upchar-  अखरोट और लहसुन समान मात्रा में पीसकर गाय के घी में भूनकर सेवन करने से यक्ष्मा में लाभ होता है।
    22.Tuberculosis(T.B.) treatment home remedies in hindi- 25 ग्राम शहद, 100 ग्राम मक्खन में मिलाकर देना चाहिए।
    23. Tuberculosis(T.B.)treatment in patanjali- जिसे क्षय रोग हो चुका हो, कष्टदायक खाँसी होती हो, जिसमें अधिक मात्रा में बलगम निकलता हो रात को इतना पसीना आता हो कि सब कपड़े भीग जायेें, साथ ही बहुत तेज बुखार रहता हो, दस्त आते हों, भूख न लगती हो, वनज भी गिर चुका हो, उनको केले का मोटे तने के टुकड़े का रस निकाल और छानकर एक-दो ताजा कप रस हर दो घंटे बाद घूँट-घँूट करके पिलाया जाये। तीन दिन रस बराबर पिलाने से रोगी को बहुत लाभ होगा। दो माह तक इस चिकित्सा से क्षय रोग से छुटकारा मिल सकता है। केले का रस हर 24 घंटे के बाद ताजा ही निकालना चाहिए।
    24 .Tuberculosis(T.B.) Treatment at Home -  आठ-दस केले के पत्ते 200 मिली लीटर पानी में डालकर पड़ा रहने दें। इस पानी को छानकर एक बड़ा चम्मच दिन में तीन बार पिलाते रहने से फेफड़ों में जमी गाढ़ी बलगम पतली होकर निकल जाती है।
    25.Tuberculosis(T.B.) Medicine- केले के पत्ते का रस मधु में मिलाकर क्षय रोगी को पिलाते रहने से भी उसके फेफड़ों के घाव भर जाते हैं। बलगम कम हो जाता है और फेफड़ों से खून आना रुक जाता है। केले के तने न हों तो केली के पत्तों का रस इसी प्रकार काम में ले सकते हैं।
    26.लौकी- ताजा लौकी पर जौ के आटे का लेप करें तथा कपड़ा लपेटकर भोभल (आग) में दबा दें। जब भुर्ता हो जाये तो पानी निचोड़ कर शक्ति अनुकूल पिलाते रहें। एक महीने पिलाने से रोगी यक्ष्मा से ठीक हो जायेगा।

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