728x90 AdSpace

  • Latest News

    Gharelu Upchar. Blogger द्वारा संचालित.

    नार्मल डिलेवरी के लिए माँ रखे इन बातो का ध्यान -Pregnancy Tips For Normal Delivery Hindi

     Pregnancy Tips For Normal Delivery Hindi

    गर्भावस्था व मोटापा
    गर्भावस्था के दौरान महिला को अपना और अपने होने वाले शिशु दोनो का खास ख्याल रखना चाहिए। उसे नई जानकारियों के प्रति सचेत रहना चाहिए ताकि आप और आपका शिशु दोनों स्वस्थ रह सके। और आपको इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि आखिर शिशु का विकास सही हो रहा है या नहीं। 
    आजकल स्त्रियों में मोटापा एक विशेष  कारण है, कारण कुछ भी हो परन्तु गर्भावस्था में चिन्ता रहती ही है। मन में एक डर बैठा रहता है कि मोटी है तो क्या नॉर्मल डिलीवरी Normal Delivery हो पाएगी? क्या आप स्वस्थ रहेगी? क्या बच्चा हष्ट-पुष्ट पैदा होगा? यह डर अधिकांष मोटी महिलाओं के मन में रहता है।
        गर्भवती मोटी स्त्रियों के बारे में अनेक स्त्री रोग विशेष ज्ञ कहती है। जिन परिवारों में सभी मोटे होते है या जिन महिलाओं की माँ, दादी, नानी, मोटी होती हैं, वे स्त्रियाँ भी मोटी हो जाती हैं। उन्हें गर्भधारण करने पर परेषान होने की आवष्यकता नहीं है। परन्तु डाॅक्टर से परामर्ष जरूर लेती रहें। वे मोटी महिलाएँ जिनका वजन ज्यादा खाने की वजह से बढ़ा हो या फिर हारमोन असंतुलन की वजह से उन्हें डाॅक्टर की सलाह पर परीक्षण कराते रहना चाहिए, जिससे डिलीवरी के दौरान कोई परेषानी न हो।

    Normal Delivery Hindi
    Pregnancy Tips For Normal Delivery 

        ज्यादातर महिलाएँ गर्भधारण के बाद शारीरिक परिश्रम करना बिल्कुल बंद कर देती है। यह ठीक नहीं है, आराम करने से मोटी महिलाओं का वजन और अधिक बढ़ जाता है, जो प्रसव के दौरान परेषानी का कारण बन सकता है। गर्भावस्था के समय योग करना भी लाभदायक रहता है। गर्भावस्था को आसान बनाने के लिये योग सबसे सुरक्षित साधन है क्योकि इसे करने पर गर्भवती को शारीरिक और मानसिक शान्ति तो मिलती ही है साथ ही मोटा होने पर भी चुस्ती-फुर्ती भी बनी रहती है। अतः किसी विशेष ज्ञ से अपना परीक्षण कराते रहना चाहिए। पद्मासन, भद्रासन, हस्तपदासन, वक्रासन प्रणायाम आदि कई आसन ऐसे है जिन्हें करने पर गर्भावस्था में लाभ होता है। अतः थोड़ा शारीरिक श्रम करना भी आवष्यक है, परन्तु इतना भी काम न करें कि थक जाएँ, थोड़े-थोड़े अंतराल पर काम करें, सप्ताह में 4 दिन जरूर आधा-एक घंटे तक टहले। हल्का-फुल्का आराम करती रहें क्योंकि देखने में आता है कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं का शरीर पीछे की तरफ झुक जाता है जिससे शरीर का फीगर तो खराब हो जाता है और कमर दर्द आदि परेषानी भी होने लगती है। अतः चलने-फिरने व उठने-बैठने के दौरान सही स्थिति अपनाने के लिए डाॅक्टर से परामर्ष करें ताकि गलत पोस्चर से गर्भस्थ शिशु व प्रसव के दौरान महिला को कोई परेषानी न हो।

    Pregnancy Tips - Garbhavastha Me Kya Khaye

    गर्भावस्था के दौरान आहार
    मोटी स्त्रियाँ किस तरह का भोजन करें जिससे उनका वजन ज्यादा  न बढ़े कि वे बेडौल नजर आएँ। उनकी खुराक कैसी होनी चाहिए जिससे भरपेट खाने के बावजूद शरीर पर चरबी न चढ़े और गर्भस्थ शिशु को भी आवष्यक भोजन मिलता रहे। 


    1-    अधिक वजन वाली महिलाएँ भोजन करते समय यह बात जरूर याद रखें कि वे जो भी भोजन करें उसमें वसा की मात्रा बहुत कम हो और खाना पौष्टिक हो।
       
    2-    गर्भवती महिलाओं को अपनी डाइटीषियन की सलाह पर अपना डाइट चार्ट बनाना चाहिए। डाइट चार्ट महिला की लंबाई, वजन और यदि उसे उच्च रक्त चाप, मधुमेह आदि जैसी कोई बीमारी हो आदि को भी ध्यान में रखकर ही बनाएँ जिससे डिलीवरी आसानी से हो और बच्चा स्वस्थ पैदा हो। अधिक वजन वाली गर्भवती संतुलित भोजन ग्रहण करें। 


    3-    सीने में जलन हो, तो खाना थोड़ी-थोड़ी मात्रा में खाना चाहिए।

    4-    गर्भवती को नमक का प्रयोग बहुत कम करना चाहिए। तलीभुनी चीजों व अचार के सेवन आदि से परहेज रखें। और अगर उच्च रक्तचाप हो, तो नमक की मात्रा कम कर देनी चाहिए।

    5-    अक्सर गर्भावस्था के समय महिलाओं को उलटियों की षिकायत रहती है।

    6-    कब्ज न हो इसके लिए रोज कच्चा सलाद, साबुत अनाज व दालों का सेवन करें।

    7-    ताजे फलों का जूस, हरी पत्तेदार सब्जियों और दूध आदि का  सेवन जयादा करें।

    8    प्रतिदिन 6 से 12 गिलास पानी व तरल पदार्थों का सेवन जरूर करें।

    9    अपने भोजन में आयरनयुक्त भोजन को इस्तेमाल करें जैसे हरी सब्जियाँ, साबुत अनाज आदि।

    10    आयरन की उपलब्धता बढ़ाने के लिए विटामिन-सी युक्त खाद्य-पदार्थों का भी प्रयोग करेंः जैसे- संतरा, मौसमी, नींबू, आँवला, अमरूद आदि।

    11    अपने भोजन में कैफीन बढ़ाने वाले पदार्थोंः जैसे- चाय, काफी आदि का सेवन ज्यादा न करें।

    12    कैल्षियम के लिए दूध व दूध से बने हुए पदार्थों का सेवन करें।

    Pregnancy Tips - Garbhavastha Me Savdhani

    गर्भावस्था के दौरान सावधानियां

    1-    मांस- गर्भावस्था के दौरान कच्चे मांस से बचा जाना चाहिए। कोलीफाॅर्म बैक्टीरिया के कारण मांस गर्भावस्था के दौरान खतरनाक हो सकता है।

    2 -   पपीता- अर्द्ध पका हुआ पपीते का सेवन नही करना चाहिए, लेटेक्स के कारण गर्भाषय के संकुचन का कारण बन सकता है।

    3 -   फल और सब्जियां- फल और सब्जियों को अच्छी तरह से धोकर खाएँ टोक्सोप्लाजमा के रूप में परीजीवी हो सकता है। 



    4 -   धूम्रपान- धूम्रपान से आपके शरीर में कैमिकल प्रवेष कर जाते है। धूम्रपान केवल आपके लिए ही बुरा नही है बल्कि यह आपके होने वाले बच्चे के लिए भी काफी खतरनाक है। इससे बच्चे की सेहत को काफी नुकसान हो सकता है। उसे अन्य गम्भीर बीमारियाँ भी हो सकती है। 


    5 - जब स्त्री को यह पता चल जाए कि वह गर्भवती हो गई है, तो वह आवष्यक व्यायाम करना प्रारम्भ कर दें। इतना ध्यान अवष्य रखें कि अत्यधिक थकान ना हो तथा पेट पर अनावष्यक दबाव ना पड़े। 
     
    6 - गर्भावस्था में व्यायाम बेहद आवष्यक व महत्त्वपूर्ण हैं। इनके
    माध्यम से प्रसवकाल की पीड़ा को तो सरल बनाया ही जा सकता है। साथ ही साथ बच्चा भी स्वस्थ व सुन्दर रहता है। गर्भावस्था के दौरान व्यायाम करने से मन की मानसिक स्थिति बेहतर होती है और शरीर में आॅक्सीजन के स्तर में भी सुधार होता है ऐसा शिशु के लिए फायदेमंद होता है।

     Pregnancy Exercise For Normal Delivery In Hindi

     व्यायाम
    हम गर्भावस्था के दौरान किये जाने वाले कुछ व्यायामों के
    विषय में यहाँ जानकारी दे रहे हैं। 


    1- पंजों के बल खड़ी हो जाएँ तथा दोनों हाथों को बाँधते हुए पेट आगे की ओर जोर देकर हाथों को पीछे की ओर खींचे, बायाँ पैर आगे बढ़ाते हुए दायें हाथ से दायें पैर के घुटने को बिना पैर मुड़े छूने का प्रयास करें। बायीं ओर से कोख बाहर की ओर निकली रहेगी। पैरों का साइड में खोलते हुए थोड़ा बायीं ओर से कोख बाहर की ओर निकली रहेगी। पैरों को साइड में खोलते हुए थोड़ा बायाँ पैर पीछे ले जाएँ। दाएँ पाँव पर शरीर का भार डालते हुए दाएँ हाथ को कोहनी से कंधे की सीध में ऊपर उठाएँ। 
               
    2- विश्राम और नींद - गर्भकाल के प्रारम्भिक दिनों में अक्सर सभी गर्भिणियों को नींद ज्यादा आती रहती है। लेकिन तीन माह के बाद यह लक्षण कम होने लगता है। गर्भावस्था के मध्य में स्वाभाविक मात्रा में नींद आती है। किन्तु अन्तिम महीनों में गर्भिणी स्त्री ठीक से नहीं सो पाती। पेट अधिक बढ़ जाने के कारण उसे इधर-उधर करवटें बदलने में परेषानी होती है। गर्भस्थ शिशु भी अधिक हरकतें करने लगता है, जिससे स्त्री ठीक से नहीं सो पाती। 


    3 - गर्भावस्था में उचित विश्राम और आवष्यक नींद का बहुत महत्त्व है। जो महिलाएँ व्यायाम करती हैं उन्हें नींद की कोई दिक्कत नहीं होती। नींद के लिए स्नान के बाद और दोपहर के भोजन से पहले का समय अति उत्तम है। इस समय बहुत गहरी नींद आती है और उठने पर गर्भिणी अपने आपको चुस्त महसूस करती है।

    • Blogger Comments
    • Facebook Comments
    Item Reviewed: नार्मल डिलेवरी के लिए माँ रखे इन बातो का ध्यान -Pregnancy Tips For Normal Delivery Hindi Rating: 5 Reviewed By: Gharelu Upay
    loading...

    Popular Posts

    Scroll to Top