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    सोमवार, 28 मई 2018

    Nipah Virus -Symptoms Causes And Prevention

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    NIPAH VIRUS -SYMPTOMS CAUSES AND PREVENTION


    खतरनाक वायरस "निपाह " तेजी से पूरे देश में  फैल रहा है। इसका कोई इलाज नहीं है और मरीज 24 घंटे के अंदर "कोमा " में चला जाता है। यह बीमारी संक्रमित सुअरो और चमगादड़ों के द्वारा फैल रही है।


    NIPAH VIRUS -SYMPTOMS CAUSES AND PREVENTION
    Nipah Virus



    क्या है निपाह वायरस -WHAT IS NIPAH VIRUS IN HINDI


    निपाह वायरस को NiV इन्फेक्शन भी कहा जाता है ,यह जूनोटिक बीमारी है यानी  ऐसी बीमारी जो जानवरो से इंसानो में फैलतीं है इस बार इसके फैलने का कारण चमगादड़ कहे जा रहे है।


    कैसे फैलता है निपाह वायरस -HOW NIPAH VIRUS SPREAD HINDI


    निपाह वायरस मनुष्यों के संक्रमित सुअर, चमगादड़ या अन्य संक्रमित जीवों से संपर्क में आने से फैलता है। यह वायरस एन्सेफलाइटिस का कारण बनता है। यह इंफेक्‍शन फ्रूट बैट्स के जरिए लोगों में फैलता है। खजूर की खेती करने वाले लोग इस इंफेक्‍शन की चपेट में जल्‍दी आते हैं।

    निपा वायरस के लक्षण -NIPAH VIRUS SIGN AND SYMPTOMS

    १. बुखार 
    २. सिरदर्द 
    ३.  दिमागी संदेह (भ्रम )
    ४. उल्टियां 
    ५. मांसपेशियों में दर्द 
    ६. निमोनिया के लक्षण 
    ७. हल्की बेहोशी 
    ८. दिमागी सूजन 

    निपा वायरस से  बचाव -NIPAH VIRUS PREVENTION

    १. संक्रमित लोगों के साथ निकट (असुरक्षित) शारीरिक संपर्क से बचें।

    २. सुअरो से दूर रहे। 

    ३. एनएच 95-ग्रेड और उससे उच्च मास्क पहनें।

    ४.ऐसे फल न खाये जिन्हे पक्षियों ने कटा हो ,फलो को बहुत सावधानी से खरीदे और बहार के खुले में मिलने वाले जूस का सेवन जरा भी न करे। 

    ५. साबुन के साथ नियमित रूप से हाथ धोएं।

    ६. पाम के रस को उपभोग करने से पहले अच्छे से उबाल लें।

    ७. खाने से पहले फलों को अच्छे से धो लें और छीलें।

    ८. अपने और बच्चों का व्यक्तिगत रूप से स्वच्छता बनाए रखें।

    ९. अपने घर को ठीक से ढक कर रखे। ज्यादा समय खिडकियों को खोल कर ना रखें।

    १०. मांसाहार  भोजन के सेवन  से बचे 

    निपा वायरस का इलाज NIPAH VIRUS TREATMENT IN HINDI

    १. वर्तमान में, मनुष्यों या जानवरों के लिए कोई टीका या दवा उपलब्ध नहीं है।

    २. डॉक्टरों का मानना है सही समय पर चिकित्सा ना हो पाने पर यह वायरस 40-100 प्रतिशत वायरस से प्रभावित मरीजों की जान ले सकता है।सहायक देखभाल के अलावा कोई निश्चित उपचार नहीं है। 

    ३. सहायक देखभाल का मतलब है कि रोगियों की बारीकी से निगरानी की आवश्यकता हो सकती है और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया जा सकता है। मरीजों को श्वसन की आवश्यकता हो सकती है और उन्हें वेंटिलेटर पर रखा जाना पड़ सकता है।

    ४. संदिग्ध क्षेत्र में या आसपास रहने वाले लोगों के लिए सतर्कता और प्रारंभिक सलाह डॉक्टर से मांगना ज़रूरी है।

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